-कॉलेज में मुफ्त जांच के अधिकार में बदलाव, अब सिर्फ दो अधिकारियों को मंजूरी का अधिकार
-गरीब, लावारिस और बंदियों की मुफ्त जांच का निर्णय अब एसआईसी और सीएमएस करेंगे
-इमरजेंसी में भर्ती मरीजों का पहले 24 घंटे का मुफ्त इलाज रहेगा जारी
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में गरीब मरीजों की मुफ्त जांच और इलाज से जुड़े अधिकारों में बदलाव किया गया है। प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने नया आदेश जारी करते हुए चिकित्सा अधीक्षकों के अधिकारों में कटौती कर दी है। अब गरीब मरीजों की जांच मुफ्त कराने की अनुमति केवल प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (एसआईसी) और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) ही दे सकेंगे।
नए आदेश के अनुसार प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अशोक यादव और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीएन शुक्ला को ही मरीजों की जांच शुल्क माफ करने का अधिकार रहेगा। पहले यह अधिकार अन्य चिकित्सा अधीक्षकों के पास भी था। बीआरडी मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में प्रतिदिन करीब चार हजार से साढ़े चार हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर मरीज भी शामिल होते हैं। इसके अलावा लावारिस मरीजों और जेल में निरुद्ध बंदियों का इलाज भी मेडिकल कॉलेज में किया जाता है। ऐसे मरीजों को नियमानुसार मुफ्त इलाज और जांच की सुविधा दी जाती है। हालांकि, इमरजेंसी में भर्ती होने वाले मरीजों के लिए पहले की व्यवस्था जारी रहेगी। ऐसे मरीजों का भर्ती होने के बाद शुरुआती 24 घंटे तक इलाज पहले की तरह निशुल्क किया जाएगा। नए आदेश के बाद मुफ्त जांच की मंजूरी की प्रक्रिया अब केवल दो वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से होगी।