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कोरोना से जुड़े हर भय को खत्म करेगी चैंपियन परिवार की कहानी, इन पर बनाई गई फिल्म

Sat, 08 Aug 2020 05:20 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

  • घर के चार सदस्य कोरोना को हरा कर जी रहे सामान्य जीवन
  • स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से परिवार पर बनाई गई है यू-ट्यूब फिल्म
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कोरोना चैंपियंस परिवार। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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कोरोना वायरस के भय और भ्रांति को खत्म करना है तो कोरोना चैंपियन श्रेयांश के परिवार की कहानी लोगों को सुननी चाहिए। परिवार के चार सदस्य कोरोना पॉजिटिव रहें, लेकिन हिम्मत नहीं हारे। मजबूत इरादों के साथ बीमारी को हरा कर घर लौटे। स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से क्रियेटिव क्रू ने इस परिवार पर एक यू-ट्यूब डाक्यूमेंट्री फिल्म तैयार की है। इसमें चैंपियन श्रेयांश कोरोना महामारी की पूरी दास्तां बता रहे हैं।

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फिल्म के जरिए श्रेयांश ने बताया कि मैं पेशे से वकील हूं और साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहा हूं। 19 जून को मेरे पापा ने बताया कि उनमें कुछ शारीरिक बदलाव महसूस हो रहा है। डॉक्टर ने कोरोना की संभावना जताई तो थोड़ा डर लगा। घर पर ही टेस्ट हुआ पापा पॉजिटिव आए।

इसके बाद डर के मारे पूरे परिवार को पसीने आ रहे थे। उनके पॉजिटिव आने के बाद हम सबकी जांच हुई और सब संक्रमित मिले। मेरी मां रो रही थी, मेरी बहन भी बहुत परेशान थी। इन परिस्थितियों में सकारात्मकता बनाए रखना कठिन हो गया था।

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मॉस्क पहनना नैतिक जिम्मेदारी

बताया है कि अस्पताल में जाने के बाद वैसा कुछ नहीं था जैसा सोचा था। वहां एक परिवार जैसा माहौल बन गया था। हमे सिस्टम से बहुत अच्छी मदद मिली। सीएमओ ने पर्सनली कॉल किया। दोस्त यारों का सपोर्ट मिला, जो काफी कारगार साबित हुआ।

बताया कि इस दौरान जानवरों पर आधारित शो देख कर अपना मनोबल बनाए रखा। अंत में कोरोना से पूरा परिवार जीत गया। फिल्म बनाने में क्रिएटिव क्रू के निदेशक अश्वनी आलोक, एसीएमओ डॉ नीरज कुमार पांडेय, डॉ मुस्तफा और सुनीता पटेल का विशेष सहयोग रहा।

श्रेयांश ने बताया कि मॉस्क पहनना सबसे पहले एक नैतिक जिम्मेदारी है। यह जिम्मेदारी अपने परिवार के प्रति और दोस्तों के प्रति है। घर में बूढ़े मां-बाप हैं और बच्चे हैं तो जरूरी नहीं कि उनकी प्रतिरोधक क्षमता आप जैसी ही हो। यह विधिक दायित्व भी है।
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