ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, इस दौरान हर दिन मां के नौ अलग-अलग रूपों मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। नवरात्र के पहले दिन घटस्थापना की जाती है। नौवें दिन ही हवन के बाद कन्या पूजन होता है। श्रद्धालु 10वें दिन पारण करते हैं।
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कलश स्थापना पूजन विधि
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, वासंतिक नवरात्र का पर्व आरंभ करने के लिए मिट्टी की वेदी बनाकर उसमें जौ और गेहूं मिलाकर बोएं। उस पर विधिपूर्वक कलश स्थापित करें। कलश पर देवी मूर्ति (धातु या मिट्टी) अथवा चित्रपट स्थापित करें।
पूजा सामग्री एकत्रित कर पवित्र आसन पर पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। इसके बाद आचमन, प्राणायाम, आसन शुद्धि करके शांति मंत्र का पाठ कर संकल्प करें। रक्षा दीपक जला लें।
वासंतिक नवरात्र की सप्तमी तिथि 28 मार्च को है। इस दिन सप्तमी तिथि संपूर्ण दिन और रात को आठ बजकर 29 मिनट तक है। इसके बाद अष्टमी तिथि है। इस दिन अर्धरात्रि में अष्टमी तिथि होने से महानिशा पूजा और बलिदानिक क्रिया संपन्न होगी।
29 को होगा अष्टमी व्रत
29 को अष्टमी तिथि का मान संपूर्ण दिन और रात्रि को 10 बजकर एक मिनट तक है। उदया तिथि में अष्टमी होने से महाष्टमी व्रत के लिए यही दिन मान्य रहेगा। जो शुरुआत और अंत दिन का नवरात्र व्रत करते हैं उनके लिए यह दिन सर्वोत्तम है।
30 को होगी पूर्णाहुति
वासंतिक नवरात्र की पूर्णाहुति 30 को होगी। इस दिन नवमी तिथि संपूर्ण दिन और रात्रि 11 बजकर 53 मिनट तक है। ऐसे में पूर्णाहुति इसी दिन होगी। वहीं व्रत का पारण दशमी तिथि यानी 31 मार्च को होगा।