गोरखपुर। मासूम बच्ची से दरिंदगी और हत्या की गुत्थी सुलझाने में 235 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सबसे अहम कड़ी साबित हुई। पुलिस ने चिलुआताल के शेरपुर चमराह से लेकर गोरखपुर-सोनौली मार्ग तक लगे कैमरों की एक-एक फुटेज खंगाली। इसी दौरान आरोपी की गतिविधियां अलग-अलग स्थानों पर रिकॉर्ड मिलीं। दोनों ओर के फुटेज के बीच करीब डेढ़ घंटे का अंतराल सामने आने से पुलिस का शक और गहरा गया। इसी कड़ी को जोड़ते हुए जांच टीम रोहिन नदी के किनारे और फिर अंत्येष्टि भवन तक पहुंची, जहां मिले खून के धब्बों और संघर्ष के निशानों के जरिये दरिंदगी के ठिकाने तक पहुंच गई।
बृहस्पतिवार सुबह करीब पांच बजे पुलिस सबसे पहले रोहिन नदी के चिउटहा पुल पहुंची, जहां पुल के आसपास झाड़ियों, बंद पड़े मकानों और नदी किनारे घंटों बच्ची की तलाश की गई लेकिन सुबह सात बजे तक उसका कोई पता नहीं चला। इसके बाद जांच टीम करहिया गांव की ओर बढ़ी। अंत्येष्टि स्थल के पास पहुंचते ही पुलिस की नजर सामने बने बंद कार्यालय पर गई। कमरे के भीतर फर्श पर खून की बूंदें, घिसटने और संघर्ष के स्पष्ट निशान मिलने पर पुलिस ने पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया। आशंका जताई गई कि वारदात को यहीं अंजाम दिया गया और बाद में शव को दूसरी जगह ले जाया गया।
करीब आधे घंटे तक अंत्येष्टि स्थल और आसपास के इलाके में तलाश के बावजूद शव नहीं मिला तो नदी में शव फेंके जाने की आशंका के आधार पर पुलिस ने खोज तेज कर दी। इसी बीच सूचना मिली कि प्रेमपुर ताल के पास रोहिन नदी किनारे शव पड़ा है। पुलिस टीम पैदल ही करीब डेढ़ किलोमीटर दूर पहुंची, जहां बच्ची का शव मिला। इसके बाद फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया।
घटनास्थल पूरी तरह रहा सील, किसी को नहीं जाने दिया गया भीतर
शव मिलने के बाद पुलिस ने पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया। किसी भी आम नागरिक को घटनास्थल के आसपास नहीं जाने दिया गया। फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने नदी किनारे और अंत्येष्टि भवन के बंद कमरे से अलग-अलग नमूने जुटाए। जांच टीम लंबे समय तक दोनों स्थानों पर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी रही। सुबह करीब नौ बजे डीआईजी एस. चन्नप्पा ने मौके पर पहुंचकर जांच की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने फॉरेंसिक टीम और पुलिस अधिकारियों से अब तक मिले साक्ष्यों की जानकारी ली। उनके साथ एसपी सिटी निमिष पाटिल, एसपी साउथ दिनेश पुरी, एसपी क्राइम, सीओ कैंपियरगंज अनुराग कुमार सिंह, सीओ गोरखनाथ रवि सिंह, सीओ गोला, सीओ बांसगांव, एसओजी, एलआईयू, चिलुआताल और पीपीगंज पुलिस की टीमें भी मौजूद रहीं। वरिष्ठ अधिकारियों के लौटने के बाद भी फॉरेंसिक और पुलिस की टीमें देर तक घटनास्थल पर जांच करती रहीं।
हथकड़ी पहनाकर कराया गया घटनास्थल का मुआयना
जांच के अहम चरण में पुलिस मुख्य आरोपी अभिषेक यादव को कड़ी सुरक्षा के बीच हथकड़ी पहनाकर घटनास्थल पर लेकर पहुंची। उससे अलग-अलग स्थानों पर निशानदेही कराई गई और घटनाक्रम की पुष्टि की गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आरोपी पूरे समय शांत दिखाई दिया। उसके चेहरे पर न तो घबराहट थी और न ही किसी तरह का पछतावा। गोरखपुर-सोनौली मार्ग पर सुबह से देर तक अधिकारियों के वाहनों की आवाजाही बनी रही। इससे पूरे इलाके में घटना की चर्चा फैल गई। देखते ही देखते आसपास के गांवों से लोग जुटने लगे। हालांकि पुलिस ने सुरक्षा कारणों से किसी को भी घटनास्थल के करीब नहीं जाने दिया। घटना को लेकर क्षेत्र में लोगों का आक्रोश लगातार बना हुआ है।