पिलर्स स्कूल के अंग्रेजी को शिक्षक रविकांत शुक्ला ने बताया कि क्लास में पढ़ने वाले हरेक विद्यार्थी का मार्गदर्शन करता हूं। कंसेप्ट क्लियर नहीं होने पर बच्चों को अलग से टॉपिक समझाता हूं। टेस्ट के नंबर के माध्यम से कमजोर, औसत और पढ़ाई में तेज बच्चों को चिह्नित कर उनके सीखने की क्षमता के मुताबिक पढ़ाते हैं। ईशान पूरे सत्र में नियमित रूप से स्कूल आता रहा। उसका अनुशासन व अध्यापकों के निर्देशों को पालन करना लाजवाब है। जो भी पढ़ाया गया उसे उसने बहुत ध्यान देकर पढ़ा जिससे उसे सफलता मिली। अन्य छात्रों की मेहनत भी परीक्षा के परिणाम में दिख रही है।
पिलर्स स्कूल की प्रधानाचार्य उषा बरतारिया ने बताया कि इस वर्ष का परिणाम भी बेहतर रहा है। इस बार कई छात्रों ने अच्छा किया है। ज्यादातर छात्र 90 फीसदी से अधिक अंकों से उत्तीर्ण हुए हैं। बेहतर रिजल्ट स्कूल के सभी शिक्षकों की मेहनत, छात्रों की लगन व अनुशासन से ही संभव हुआ है। मैं परिणाम से संतुष्ट हूं। इसे और बेहतर बनाने की दिशा में काम होगा। शिक्षक ओपी सिंह, सुधांशु, रविकांत, वाईडी मिश्र सहित सभी शिक्षकों व सफल छात्रों को अनेक बधाई।
हर्षिता गुप्ता ने 96.6 प्रतिशत अंक पाकर 12वीं के मैथ संवर्ग में जिले में तीसरा स्थान हासिल किया है। उन्होंने कहा कि बड़ी बहन की तरह वे भी डॉक्टर बनना चाहती हैं। किसी और क्षेत्र में उन्होंने कॅरियर बनाने की नहीं सोची है। कहती हैं कि डॉक्टर बनने की दिशा में उनकी तैयारी चल रही है। सफलता पाने की दिशा में उनका कहना है कि कड़ी मेहनत से पीछे न हटें। वक्त कीमती है। इसे यूं ही न जाने दें।
लक्ष्य की ओर ले जाने वाले काम करें और जब खाली हों तो अपने शौक को भी जरूर पूरा करें। सकारात्मक और उत्साही बनिए। सफलता का श्रेय उन्होंने शिक्षकों व परिजनों के सहयोग व योगदान को दिया। वे जीएन नेशनल पब्लिक स्कूल की छात्रा हैं। उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। मां का नाम कल्पना है जो रेलवे में कार्यरत हैं। तीन बहनों की जिम्मेदारी मां बखूबी निभाती हैं। हर्षिता बताती हैं कि दिन में अधिकतर चार से पांच घंटे की पढ़ाई ही करती हैं।
घर में बड़ी बहनों को देखकर प्रेरित होती रही हूं। मां का संघर्ष भी कम नहीं रहा है। उनका योगदान सबसे ऊपर और महत्वपूर्ण रहा है। पूरे साल परीक्षा की तैयारी करने के दौरान उनकी कही बातें, विश्वास और सहायता को हमेशा याद रखूंगी। परीक्षाओं में हड़बड़ी ठीक नहीं होती है। घर पर टाइम टेबल के हिसाब से ही पढ़ाई करें। इस बीच कोई और काम करने से परहेज करें। इससे ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित रहता है। स्कूल में शिक्षकों की सलाह को मानना चाहिए। उनका निर्देशन सफलता से अहम होता है।
स्कोर कार्ड
हिंदी : 97
अंग्रेजी : 99
बायोलॉजी : 97
फिजिक्स : 85
केमेस्ट्री : 95
12वीं, आंचल यादव, 97 प्रतिशत, बायोलॉजी वर्ग ( ओवर आल चौथा स्थान) (बायोलॉजी वर्ग में दूसरा)
ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल की छात्रा आंचल यादव को 12वीं के बायोलॉजी वर्ग में 97 प्रतिशत अंक मिले हैं। सफलता से उत्साहित आंचल ने इसका श्रेय अपनी मां को दिया। कहा कि उनके आशीर्वाद से ही यह संभव हो सका। मां ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया है। उनका सपना है कि मैं डॉक्टर बनकर देश की सेवा करूं । इस सपने को पूरा करने के लिए मैं पूरी मेहनत कर रही हूं। आने वाले समय में डॉक्टर जरूर बनूंगी।
शहर में रानीबाग के प्रज्ञा नगर कॉलोनी में पिता बाबू लाल यादव के साथ आंचल रहती हैं। उन्होंने कहा कि वे स्कूल से आने के बाद पांच घंटे से ज्यादा नहीं पढ़ती थीं। उनके चचेरे भाई भी डॉक्टर हैं। बचपन से ही उन्हें देखा है। धरती पर डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है। कोरोना संकट के समय डॉक्टर अपनी जान हथेली पर रखकर मानव की सेवा कर रहे हैं।
उन्हें 10 वीं में 95 प्रतिशत अंक हासिल हुए थे। अन्य छात्रों के लिए टिप्स में उन्होंने कहा कि सभी सब्जेक्ट पर बराबर ध्यान दें, वीकली टारगेट सेट करें। उसे हासिल करने के लिए जीजान से जुटें। एनसीआरटी की किताबें बेहद कारगर हैं। फिजिक्स के सवालों को ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस करें।
स्कोर कार्ड
फिजिक्स : 95
बायोलॉजी : 99
केमिस्ट्री : 99
हिंदी: 98
अंग्रेजी : 94
12वीं की परीक्षा में 97.2 फीसद अंक हासिल कर ओवरऑल तीसरा स्थान हासिल करने वाले शिवांशु प्रताप सिंह का पूरा परिवार बेटे की उपलब्धि से गदगद है। टॉपरों में नाम शामिल होने की सूचना मिली तो खुशी का कोई ठिकाना न रहा, पिता ने बेटे के माथा चूमा और कहा मेरा बेटा ही सही मायने में मेरा कुलदीपक है।
उसका सपना डॉक्टर बनने का है और इसे पूरा करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ूंगा। दिव्य नगर निवासी व्यवसायी पिता धीरेंद्र कुमार सिंह व गृहिणी प्रतिमा सिंह के पुत्र शिवांशु ने सेंट्रल हिन्दू स्कूल से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की है। उनके बड़े भाई हिमांशु बीएससी के छात्र हैं। सोशल मीडिया प्लेटफार्म की बात करें तो फेसबुक पर उनकी उपस्थिति है लेकिन उसपर अधिक समय देना उन्हें पसंद नहीं है। कहते हैं कि यही समय है जब अपने सपनों को साकार करने के लिए मनोयोग से कोशिश की जा सकती है।