अहिंसा के बल पर क्रुर अंग्रेजी हुकूमत को हिलाकर रख देने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का मानना था कि अहिंसा का अर्थ किसी जीव को केवल शारीरिक कष्ट पहुंचाना ही नहीं है बल्कि मन और वाणी द्वारा भी कष्ट पहुंचाना भी अहिंसा की श्रेणी में आता है। अहिंसा का अर्थ बुराई के बदले भलाई करना और नफरत के बदले प्रेम करना होता है।
अब उनके मूल्यों पर आधारित अहिंसा को आधार मानकर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्कूली बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को नॉन वायलेंस कम्युनिकेशन का कोर्स कराने जा रहा है। इसका आदेश बोर्ड से संचालित 117 स्कूलों में पहुंच गया है।
आदेश के मुताबिक, हर वर्ग के कोर्स में 10 अक्तूबर तक पंजीकरण होगा। संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत स्वायत्त संस्था गांधी स्मृति और दर्शन स्मृति के सहयोग से बोर्ड ने पंजीकरण शुरू कर दिया है। कोर्स के लिए कोई पंजीकरण शुल्क या कोर्स शुल्क नहीं रखा गया है। जिससे अधिक से अधिक लोग इसमें हिस्सा ले सकें और अपनी बात कहने या अपना संदेश पहुंचाने के लिए अहिंसात्मक के बारे में विस्तार से जान व पढ़ सकें।
इसका प्रमुख उद्देश्य बच्चों व अभिभावकों और बच्चों और शिक्षकों के बीच के संवाद को मधुर और अहिंसात्मक बनाए रखना है। इस बाबत सीबीएसई ने कोर्स में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए प्रधानाचार्यों और शिक्षकों और अभिभावक व छात्रों के लिए अलग-अलग लिंक वेबसाइट पर जारी किए हैं। पंजीकृत लोगों को अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने के अलावा कुछ वेबिनार भी आयोजित किए जाएंगे। कोर्स पूरा होने पर सभी को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।