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यूपी: देवरिया में फिर गरमाने लगा प्रेक्षागृह के नामकरण का प्रकरण, सांसद और सभासद में हो चुकी है मारपीट

Tue, 24 Nov 2020 06:36 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, देवरिया।
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प्रेक्षागृह के नामकरण को लेकर हो रहा विवाद। - फोटो : अमर उजाला।
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देवरिया में टाउनहाल कैंपस में प्रेक्षागृह के नामकरण एवं प्रतिमा स्थापित करने का मामला एक बार फिर गरमाने लगा है। उपचुनाव की वजह से पूरा मामला शांत हो गया था, लेकिन सदर सांसद एवं भाजपा सभासद के बीच उपजे विवाद के बाद यह मामला एक बार फिर गरमा गया है।

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नगरपालिका परिषद बोर्ड की मंगलवार को होने वाली है। बैठक में इस मामले को लेकर हंगामा होने के आसार हैं। प्रेक्षागृह का नाम पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर हो या पूर्व सांसद स्व. मोहन सिंह के नाम, इस मुद्दे पर भाजपा के कद्दावर नेता चुप्पी साध लिए हैं।

सूत्रों के मुताबिक अधिकतर नेता स्व. मोहन सिंह के नाम पर ही प्रेक्षागृह का नामकरण कराएं जाने के पक्ष में हैं। उनका कहना है कि इसके निर्माण में पूर्व राज्यसभा सदस्य कनकलता के योगदान को नकारा नहीं जा सकता।  
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नगरपालिका परिषद ने वर्ष 2016 में टाउनहाल कैंपस में नया सवेरा योजना के तहत प्रेक्षागृह (ऑडिटोरियम) निर्माण की कवायद शुरू की। पूर्व सांसद मोहन सिंह की पुत्री तत्कालीन राज्यसभा की सदस्य रहीं कनकलता सिंह के प्रयास से चार करोड़ 12 लाख रुपये स्वीकृत हो गया। इसके बाद तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडेय के द्वारा शिलान्यास पूर्व सांसद स्व. मोहन सिंह के नाम किया गया।

प्रेक्षागृह बनकर तैयार भी हो गया, लेकिन नगरपालिका बोर्ड में कोई प्रस्ताव नामकरण को लेकर पास नहीं हो सका। इसी बीच 21 सितंबर 2019 को नगरपालिका बोर्ड की बैठक हुई, जिसमें भाजपा सभासद आशुतोष तिवारी ने प्रेक्षागृह का नाम पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नाम किए जाने का प्रस्ताव लाए, जिसे सदन ने पास कर दिया। कमिश्नर की मंजूरी भी मिल गई। इसी बीच 19 सितंबर 2020 की रात में स्व. मोहन सिंह की प्रतिमा स्थापित कर प्रेक्षागृह में उनका नाम लिख दिया गया।

यह प्रकरण अमर उजाला ने अपने 21 सितंबर के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था, जिसके बाद हंगामा खड़ा हो गया। उपचुनाव को देखते हुए पूरा मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था, लेकिन सदर सांसद रमापति राम त्रिपाठी एवं सभासद आशुतोष तिवारी के बीच इसी मुद्दे को लेकर उपजे विवाद ने एक बार फिर मामला गरम कर दिया है।

24 नवंबर को नगरपालिका बोर्ड की बैठक होनी है। ऐसे में इस मामले में हंगामा हो सकता है। इसका कारण यह है कि सभासद दो गुटों में बंट गए हैं। एक गुट पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी तो दूसरा बाबू मोहन सिंह के नाम से प्रेक्षागृह का नामकरण चाहता है।

 

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बोले जिम्मेदार

भाजपा जिलाध्यक्ष अंर्तयामी सिंह ने कहा कि मामला गंभीर है। इससे भाजपा के क्षेत्रीय एवं प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखकर अवगत पहले ही कराया जा चुका है। इसके अलावा जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों एवं अन्य नेताओं को भी अवगत करा दिया गया है। अभी कोई निर्देश संगठन को प्राप्त नहीं हो सका है। जैसा निर्देश प्राप्त होगा संगठन उसी के तहत कार्य करेगा।
 
नगरपालिका परिषद अध्यक्ष अलका सिंह ने कहा कि नगरपालिका बोर्ड ने प्रस्ताव पास करके स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर प्रेक्षागृह को किया। सदन की एक गरिमा है। इस संबंध में डीएम को 25 अगस्त को पत्र लिखकर मैंने पूछा था कि शासन स्तर से कोई इस संबंध में निर्देश प्राप्त हुआ तो अवगत कराएं, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। स्व. मोहन की प्रतिमा कब और किसके इशारे पर लगी इसकी जांच भी प्रशासन ने नहीं कराई। न ही तहरीर देने के बावजूद केस दर्ज किया गया।  

पूर्व राज्यसभा सदस्य कनकलता सिंह ने बताया कि टाउनहाल प्रेक्षागृह निर्माण के लिए चार करोड़ बारह लाख रुपये की स्वीकृति सपा शासनकाल में मेरे प्रयास से मिली। शिलान्यास भी तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष द्वारा कराया गया। उस समय भी अलका सिंह अध्यक्ष थीं और उन्हीं की अध्यक्षता में कार्यक्रम भी हुआ था। अटल जी देश के नेता थे। मेरे पिता स्व. मोहन सिंह की कर्मभूमि देवरिया है। ऐसे में उनके नाम से शिलान्यास कराकर नामकरण करा दिया गया तो अब नाम नहीं बदला जाना चाहिए। नगरपालिका बोर्ड के सदन का मैं सम्मान करती हूं और चाहती हूं कि स्व. मोहन सिंह के नाम से प्रेक्षागृह का नामकरण पूर्ववत रखा जाए।
 
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