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जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड का मामला: पंचायत में जुटे किसानों ने फिर रुकवाया सर्वे, हंगामे देख लौटे अफसर

Mon, 10 Jul 2023 03:33 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गुलरिहा।

सार

रिंग रोड के दायरे में आने वाली जमीन पर अधिकांश किसानों ने धान की रोपाई कर दी है। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के पूर्व किसानों ने गोरखनाथ मंदिर में जाकर सीएम से मिलने का प्रयास किया। लेकिन नहीं मिल पाए। फिर किसानों ने बैठक करके आगे की रणनीति तय करने का फैसला लिया।
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जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड का मामला - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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जंगल कौड़िया-जगदीशपुर रिंग रोड के दायरे में आने वाले 26 गांवों के किसानों ने मुआवजे की रकम को लेकर रविवार को इटहिया गांव के पास स्वामी दयानंद इंटर कॉलेज में पंचायत बुलाई थी। अभी किसान अपनी रणनीति तैयार कर रहे थे कि इसी बीच उन्हें सूचना मिली कि गांव के पास ही सड़क का सर्वे करने नायब तहसीलदार विकास कुमार, एनएचएआई और एसएलओ के कर्मचारी पहुंचे हैं। किसान उनके पास पहुंच गए और एक बार फिर सर्वे रोकवाकर हंगामा शुरू कर दिया। अधिकारियों ने उन्हें समझाने की कोशिश की पर नाकाम रहे। इसके बाद अधिकारी लौट गए। वहीं किसानों ने अब आंदोलन का ऐलान कर दिया है।

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दरअसल, कोनी, बालापार, जंगल सुभान अली, मौलाखोर, महमूदाबाद, कैथवलिया, करमहा, मौलाखोर, औराही, नाहरपुर, मदरहवा समेत 26 गांवों के किसान जमीन के साथ मकान का मुआवजा भी बाजार रेट पर देने की मांग पर अड़े हैं। अधिकारियों ने आर्बिट्रेशन (न्यायिक मध्यस्थता) में जाने की सलाह दी है। वहीं, डीएम ने भी किसानों को भरोसा दिया था कि वे आर्बिटेशन में जाएं। उन्हें अधिक से अधिक मुआवजा दिलाने की कोशिश होगी।

उधर, किसान अपनी बात पर अड़े हैं। रविवार को सुबह करीब 10 बजे किसानों ने बातचीत के लिए पंचायत बुलाई थी। इसी बीच जब उन्हें पता चला कि प्रशासन, एनएचएआई और एसएलओ के लोग सर्वे कर रहे हैं तो उनका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
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किसानों के विरोध को देखते हुए अधिकारियों ने काम रोकवा दिया। इसकी जानकारी नायब तहसीलदार ने डीएम को दी। डीएम के निर्देश पर तहसीलदार सदर विकास सिंह भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने भी किसानों को समझाने का प्रयास किया। तहसीलदार ने इस माह के अंत तक आर्बिट्रेशन दाखिल करने का समय दिया।

किसानों ने कहा कि जब तक मामले का निस्तारण नहीं हो जाता, किसी तरह का सर्वे, जमीन की सफाई आदि न कराएं। इस दौरान विकास पांडेय, सुमित साहनी, गुलाब चंद्र, वीरेंद्र , बशिष्ठ मुनि शुक्ला आदि मौजूद रहे।

किसानों ने नहीं दिया है सहमति पत्र

26 गांवों के किसानों की भूमि अधिग्रहित की गई है। लेकिन उन्होंने सहमति पत्र जमा नहीं किया है। इससे किसानों के बैंक खातों में मुआवजे की रकम नहीं भेजी जा सकी है। मई माह से ही गांवों में शिविर लगाकर एनएचएआई (भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण), एसएलओ (विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी) और राजस्व कर्मचारी लोगों से सहमति पत्र जमा कराने की अपील कर रहे हैं। लेकिन मुआवजे की दर कम होने की बात कहकर किसान रकम लेने से मना कर रहे हैं।

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पहली बार बुलाई महापंचायत, किसानों ने दिखाए तेवर
रिंग रोड के दायरे में आने वाली जमीन पर अधिकांश किसानों ने धान की रोपाई कर दी है। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के पूर्व किसानों ने गोरखनाथ मंदिर में जाकर सीएम से मिलने का प्रयास किया। लेकिन नहीं मिल पाए। फिर किसानों ने बैठक करके आगे की रणनीति तय करने का फैसला लिया। पहली बार किसानों ने रविवार को इटहिया के स्वामी दयानंद इंटर कॉलेज में महापंचायत बुलाई, जिसमें प्रभावित सभी गांवों से किसान जुटे। किसानों ने सख्त लहजे में चेताया कि यदि प्रशासन ने उचित निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन तय है।

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बोले किसान

कर्महा निवासी चंद्रशेखर ने कहा कि जमीन की दर चार से पांच लाख रुपये प्रति डिसमिल है। प्रशासन हम लोगों को 60 हजार से एक लाख रुपये ही दे रहा है। इससे हम लोगों को बहुत नुकसान हो जाएगा। हमें बाजार रेट पर मुआवजा चाहिए।
 
इटहिया निवासी रामचरित्र ने कहा कि प्रशासन सिर्फ जमीन का ही मुआवजा देने को राजी है। जिनका मकान सड़क के दायरे में आ रहा है, उनको सिर्फ जमीन का मुआवजा मिलेगा, यह कहां का न्याय है। मकान का पैसा नहीं मिलेगा तो नया घर कैसे बनवा पाएंगे।

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बनकटी निवासी पन्नेलाल ने कहा कि अभी हम लोग एक बार फिर सीएम से मिलेंगे। उन तक अपनी बात पहुंचाना जरूरी है। अधिकारी इसको लेकर गंभीर नहीं है। मुझे पूरा विश्वास है कि सीएम हम लोगों की पीड़ा समझेंगे।

बालापार निवासी अरविंद सिंह ने कहा कि प्रशासन जबरन निर्माण कराना चाहता है। हम लोगों ने तहसीलदार से कहा गया है कि जब तक मामले का निस्तारण नहीं हो जाता है, तब तक कोई काम न कराएं। अब देखिए आगे क्या करते हैं।

तहसीलदार सदर विकास कुमार सिंह ने कहा कि किसान मुआवजा की रकम बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। उनको आर्बिट्रेशन में जाने की सलाह दी गई है। कहा गया है कि जुलाई माह के अंत तक अपना वाद दाखिल करा दें। किसानों से अपील की गई है कि काम न रोकें। उनकी मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाएगा।



 
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