जानकारी के मुताबिक, रुद्रांश पांडेय के पिता ने ही सबसे पहले ग्रामीण फाइनेंस कंपनी खोलकर जालसाजी की थी। 100 से अधिक जालसाजी के मामले सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी को पकड़ा तो उसने अपना नाम बदल दिया। वह अष्टभुजा से राजेश पांडेय हो गया। वहीं, कई लोग यह भी बताते हैं कि रुद्रांश का ही नाम अष्टभुजा है। अब सच्चाई क्या है, इसकी जांच पुलिस कर रही है।
यही नहीं, मां अर्चना पांडेय ने भी अपना नाम बदलकर प्रधानी का चुनाव लड़ा था। वह बच्ची पांडेय बनकर प्रधान भी रही, लेकिन इसके बाद एक और जालसाजी का मामला सामने आने के बाद वह गांव छोड़कर फरार हो गई। अब परिवार ने गांव से नाता तोड़ लिया है।
जांच में सामने आया है कि लखनऊ में रुद्रांश पकड़ा गया तो उसके आधार कार्ड पर उसकी पहचान राप्तीनगर शाहपुर दर्ज थी। गोरखपुर में पकड़ा गया तो बस्ती का पता मिला। जबकि, उसका असल पता बांसगांव थाना क्षेत्र का बगही गांव है, यह अब सामने आया है।
उधर, पुलिस आरोपी रुद्रांश पांडेय के मां-बाप के जालसाजी में शामिल होने की आशंका पर उनकी भी तलाश शुरू कर दी है। उनके सामने न आने की वजह से पुलिस का शक गहरा हो गया है। पुलिस उनका नाम केस में बढ़ाने की तैयारी में है। दोनों के पुराने जालसाजी के रिकॉर्ड भी हैं, इस वजह से पूरा संदेह है कि इस नए जालसाजी में भी ये लोग शामिल हो सकते हैं।
एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नाेई ने कहा कि पुलिस की जांच में रुद्रांश के जालसाजी के कई मामले सामने आए हैं। रुद्रांश, उसके मां-बाप के कई नाम होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, पुलिस बैंक जालसाजी के प्रकरण की जांच को साक्ष्यों के साथ आगे बढ़ा रही है। जल्द ही इस पूरे गिरोह का पुलिस पर्दाफाश कर लेगी।