गोरखपुर। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) का आयोजन रविवार को शहर के 43 केंद्रों पर हुआ। प्रशासन का दावा है कि परीक्षा सकुशल संपन्न करा ली गई। कुल 21,359 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। इसमें से 19,723 उपस्थित व 1,636 अनुपस्थित रहे। परीक्षा देकर निकले अभ्यर्थियों ने बताया कि इस बार भौतिकी के प्रश्नों ने काफी उलझाया लेकिन जीवविज्ञान के सवालों ने राहत दी।
परीक्षार्थियों के अनुसार, भौतिकी के कई प्रश्न अवधारणात्मक और समय लेने वाले थे, जिससे उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ा। वहीं बायोलॉजी के अधिकांश प्रश्न एनसीईआरटी आधारित और सीधे पूछे गए थे, जिन्हें हल करने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई। केमिस्ट्री का स्तर सामान्य से मध्यम रहा। कई छात्रों ने बताया कि पिछली बार उनका पेपर बेहतर हुआ था, इस बार तुलनात्मक रूप से सवाल कठिन लगे। इस वजह से उन्हें समय प्रबंधन करने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
अभ्यर्थियों और अभिभावकों ने उम्मीद जताई कि इस बार पेपर लीक जैसी किसी घटना की पुनरावृत्ति नहीं होगी। मेहनती विद्यार्थियों को उनकी तैयारी के अनुरूप परिणाम मिलेगा।
पुनर्परीक्षा में 5.39 प्रतिशत घटे अभ्यर्थी
गोरखपुर। इस बार कुल पंजीकृत 21,359 अभ्यर्थी में से 19,723 उपस्थित व 1,636 अनुपस्थित रहे। यानी इस परीक्षा में कुल 92.34 प्रतिशत ही शामिल हुए, जबकि 7.66 प्रतिशत ने परीक्षा छोड़ दी। तीन मई को आयोजित परीक्षा में 21,291 पंजीकृत थे, जिनमें 20808 उपस्थित और 483 अनुपस्थित रहे थे। यानी 97.73 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी थी और 2.27 प्रतिशत अनुपस्थित रहे थे। इस तरह डेढ़ महीने बाद हुई पुनर्परीक्षा में करीब 5.39 प्रतिशत अभ्यर्थी कम रहे। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि इस बार गोरखपुर के विभिन्न केंद्रों पर परीक्षार्थियों की संख्या में महज 68 की वृद्धि हुई थी लेकिन अनुपस्थिति का अंतर बहुत अधिक रहा। पुनर्परीक्षा में किन वजहों से अभ्यर्थियों की उपस्थिति में इतनी कमी आई, इसे लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
परीक्षा के दौरान बरती गई विशेष सतर्कता
गोरखपुर। पुनर्परीक्षा को लेकर प्रशासन व पुलिस की ओर से विशेष सतर्कता बरती गई। सभी केंद्रों पर सुरक्षा के अभेद्य इंतजाम किए गए थे। भीषण गर्मी को देखते हुए छात्रों की सुविधाओं का भी पूरा ख्याल रखा गया। सभी केंद्रों पर बिजली और पानी के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। प्रक्रिया को देखते हुए बड़ी संख्या में अभ्यर्थी समय से काफी पहले ही केंद्रों पर पहुंच गए थे, ताकि उन्हें किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।