गोरखपुर विश्वविद्यालय के पांच विभागों में शोध के लिए पंजीकृत तृतीय श्रेणी के विद्यार्थियों का मामला उलझ गया है। पंजीकरण के समय विद्यार्थियों के अंक पत्र नहीं जांचे गए। अब, जबकि मामला पकड़ में आया है तो विभागाध्यक्षों ने विद्यार्थियों का पंजीकरण निरस्त करने का निर्णय लिया है। इसके विरोध में आठ शोधार्थियों ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन के सामने धरना दिया और कुलपति को ज्ञापन सौंपा। कुलपति ने तीन मार्च को होने वाली अकादमिक कौंसिल की बैठक में मामला रखने का निर्णय लिया है।
जिन विद्यार्थियों का पंजीकरण रद्द किया गया है वे समाजशास्त्र, दर्शनशास्त्र, संस्कृत, राजनीति शास्त्र एवं गणित विभाग के हैं। ये सभी विद्यार्थी शुक्रवार को प्रशासनिक भवन के सामने पहुंचे और नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए। इसके बाद उन्होंने कुलपति से मुलाकात की। विद्यार्थियों का कहना है कि यूजीसी की गाइड लाइन में कही नहीं है कि तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण होने वालों को शोध से वंचित किया जाए।
विश्वविद्यालय ने पंजीकरण कर शुल्क जमा कर लिया और चार महीने कक्षाएं भी करने दीं। अब साजिशन शोध से वंचित कर रहे हैं। शोध छात्र कमलेश यादव ने कहा कि विभिन्न विभागों में 50 से ज्यादा शोधार्थी हैं जो तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण हैं। कहा कि दो मार्च से क्रमिक धरना शुरू किया जाएगा। उधर, कुलपति ने दोपहर बाद डीन एडवाइजरी कमेटी बुलाकर मामले में विमर्श किया। धरना देने वालों में अनूप ईश्वर, पवन कुमार, सुरेंद्र, नागेंद्र, वाल्मीकि, सुनील पासवान, अजय यादव, पंकज यादव आदि मौजूद रहे।
मामला संज्ञान में आने पर डीन एडवाइजरी कमेटी के सामने रखा गया था। कमेटी ने विश्वविद्यालय नियमावली का परीक्षण किया है जिसके बाद निर्णय लिया है कि तृतीय श्रेणी उत्तीर्ण अभ्यर्थी को शोध की अनुमति नहीं दी जा सकती है। डीन एडवाइजरी कमेटी के निर्णय को तीन मार्च को होने वाले अकादमिक कौंसिल के सामने रखा जाएगा। अगर अकादमिक कौंसिल संशोधन करती है तो उसे लागू किया जाएगा वरना डीन एडवाइजरी कमेटी का निर्णय ही मान्य होगा।
प्रो. वीके सिंह, कुलपति, गोरखपुर विश्वविद्यालय