लॉकडाउन में शहर के निजी और सरकारी स्कूलों का पूरा फोकस ऑनलाइन पढ़ाई पर टिका है। ज्यादातर स्कूलों ने व्हाट्सएप के जरिए बच्चों की पढ़ाई शुरू करा दी है। विद्यार्थियों को रोजाना उनकी कक्षा के मुताबिक विषय और उससे जुड़े सवाल हल करने के लिए दिए जा रहे हैं। लेकिन कॉपी और किताब के अभाव में विद्यार्थी न तो होमवर्क कर पा रहे हैं और न ही विषय को समझ पा रहे हैं। ऐसे में यह कवायद बहुत लाभप्रद होती नहीं दिख रही है।
कोरोना महामारी की वजह से स्कूल-कॉलेज मार्च से बंद हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने विद्यार्थियों का समय बर्बाद न हो इसे लेकर सीबीएसई, आईसीएसई, यूपी बोर्ड के साथ परिषदीय विद्यालयों में ऑनलाइन कक्षाएं चलाने का निर्देश दिया है। ज्यादातर स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। जहां हो गई है, वहां भी बच्चों को अभी कॉपी और किताबें नहीं दी जा सकी हैं।
जून तक कमोबेश यह स्थिति बने रहने के आसार हैं। ऐसे में यूनिवर्सिटी या कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों के लिए तो ऑनलाइन क्लास बेहतर रिजल्ट दे सकती है। मगर स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों को बिना कॉपी-किताब के संबंधित विषय को समझना मुश्किल हो रहा है। मसलन अगर किसी विषय में 10 पेज का एक अध्याय है।