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लॉकडाउन में ऑनलाइन कक्षाएं हो गईं शुरू, अब बच्चों के सामने आ रही ये चुनौती

Fri, 17 Apr 2020 03:59 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
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सांकेतिक तस्वीर।
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लॉकडाउन में शहर के निजी और सरकारी स्कूलों का पूरा फोकस ऑनलाइन पढ़ाई पर टिका है। ज्यादातर स्कूलों ने व्हाट्सएप के जरिए बच्चों की पढ़ाई शुरू करा दी है। विद्यार्थियों को रोजाना उनकी कक्षा के मुताबिक विषय और उससे जुड़े सवाल हल करने के लिए दिए जा रहे हैं। लेकिन कॉपी और किताब के अभाव में विद्यार्थी न तो होमवर्क कर पा रहे हैं और न ही विषय को समझ पा रहे हैं। ऐसे में यह कवायद बहुत लाभप्रद होती नहीं दिख रही है।
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कोरोना महामारी की वजह से स्कूल-कॉलेज मार्च से बंद हैं। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने विद्यार्थियों का समय बर्बाद न हो इसे लेकर सीबीएसई, आईसीएसई, यूपी बोर्ड के साथ परिषदीय विद्यालयों में ऑनलाइन कक्षाएं चलाने का निर्देश दिया है। ज्यादातर स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। जहां हो गई है, वहां भी बच्चों को अभी कॉपी और किताबें नहीं दी जा सकी हैं।

जून तक कमोबेश यह स्थिति बने रहने के आसार हैं। ऐसे में यूनिवर्सिटी या कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों के लिए तो ऑनलाइन क्लास बेहतर रिजल्ट दे सकती है। मगर स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों को बिना कॉपी-किताब के संबंधित विषय को समझना मुश्किल हो रहा है। मसलन अगर किसी विषय में 10 पेज का एक अध्याय है।
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स्कूल कराएं किताबों की होम डिलीवरी

तो पांच मिनट के छोटे से वीडियो में एक शिक्षक कैसे पूरे विषय की महत्ता और सवाल-जवाब बच्चों को समझा सकता है। ऐसे में एक कक्षा के विद्यार्थी को समझाने के लिए कई वीडियो बनाने होंगे, क्योंकि बच्चा उस विषय के बारे में कुछ जानता ही नहीं है। अगर उसे जानकारी पहले से होगी तो शिक्षक की तरफ से समझाई जाने वाले चीजें उसे आसानी से समझ में आएंगी।

गीतावाटिका की एकता श्रीवास्तव ने बताया कि बेटी कृतिका का एडमिशन कक्षा आठ में कराया है। एडमिशन के तुरंत बाद लॉकडाउन घोषित हो गया। जिस वजह से किताबें नहीं खरीदी जा सकीं। बिना विषय की जानकारी के बेटी को पढ़ाई करने में परेशानी हो रही है। किताब रहे तो मैं भी उसे पढ़ा सकती हूं। जिला प्रशासन से मांग है कि वो स्कूलों को किताबों की डिलिवरी अभिभावकों तक कराने का निर्देश दें।

पिछड़ जाएगा पाठ्यक्रम
पादरी बाजार के विजय शर्मा ने कहा कि किताबें नहीं होंगी तो बच्चों का सिलेबस पिछड़ना तय है। आठवीं तक के बच्चों को तो फिर भी इतनी परेशानी नहीं होगी, मगर जो बच्चे इस बार बोर्ड कक्षाओं में गए हैं, उन्हें ज्यादा परेशानी होगी। जून के बाद अगर किताबें मिलेंगी तो वो कब अपनी पढ़ाई शुरू कर सकेंगे। मेरा एक बेटा पांचवीं और दूसरा दसवीं कक्षा में है।

नवल्स ग्रुप निदेशक संजयन त्रिपाठी ने बताया- किताबों को लेकर अभिभावकों के फोन लगातार स्कूल के हेल्पलाइन नंबर पर आ रहे हैं। उन्हें लॉकडाउन खुलने तक इंतजार करने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन की तरफ से अगर अनुमति मिले तो किताबें अभिभावकों तक पहुंचाई जा सकती हैं।
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