गोरखपुर। आवाज भले ही नहीं है लेकिन हुनर की चमक हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रही थी। कोई मिट्टी के दीयों को आकर्षक रंगों से सजाकर ग्राहकों का इंतजार कर रहा था तो कोई मोमबत्तियों को खूबसूरत आकार देकर अपनी कला का प्रदर्शन कर रहा था। बोलने में असमर्थ बच्चे इशारों के जरिये लोगों को अपने स्टॉल तक बुला रहे थे और बनाए गए उत्पादों की खूबियां बता रहे थे।
यह नजारा शुक्रवार को विकास भवन परिसर में आयोजित मंडल स्तरीय दिव्यांगजन दिव्य दिवाली मेले का था। यहां दिव्यांग बच्चों के हुनर और आत्मविश्वास ने लोगों का दिल जीत लिया। संकेत विद्यालय गोरखपुर की मूक-बधिर छात्राएं मायरा, जानवी साहनी और सृष्टि ने मिट्टी के दीयों को आकर्षक सजावटी सामान का रूप दिया था। उनके बनाए टेराकोटा के खिलौने भी लोगों को खूब पसंद आए। स्टॉल पर पहुंचने वाले ग्राहकों को बच्चे इशारों में अपने उत्पादों के बारे में बताते और खरीदारी के लिए प्रेरित करते नजर आए।
मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी ने बच्चों के हुनर को देखा तो खुद भी उनके स्टॉल से खरीदारी की और उनका उत्साह बढ़ाया। वहीं, बचपन डे केयर सेंटर गोरखपुर के श्रवण बाधित इमान और दृष्टिबाधित साधना ने आकर्षक आकार की मोमबत्तियां तैयार की थीं। मेले में पहुंचे लोगों ने भी बच्चों के बनाए उत्पादों की सराहना की और खरीदारी की। राजकीय मानसिक मंदित आश्रयगृह के बच्चों ने फूल-बत्ती और मोमबत्तियों के सेट तैयार किए थे।
कोट
दिव्यांग बच्चों के बनाए उत्पादों की गुणवत्ता अच्छी है लेकिन अब तक उन्हें अपने उत्पादों की बिक्री के लिए बेहतर बाजार नहीं मिल पा रहा था। विकास भवन परिसर में मेले के आयोजन से उनके हुनर को मंच के साथ बाजार भी मिला है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से भी अपील की कि वे दिव्यांग बच्चों के बनाए उत्पाद खरीदकर उनका उत्साह बढ़ाएं।
-शाश्वत त्रिपुरारी, मुख्य विकास अधिकारी