सूदखोरों ने बाकायदे अपने साथ मनबढ़ युवकों को रख लिया है। वे उन्हें महीने में अच्छी-खासी रकम देते हैं। उनका खर्च भी उठाते हैं। रुपये वसूलने के लिए मनबढ़ मुस्टंडे कर्जदार से जोर-जबरदस्ती करते हैं। उनके परिवारीजनों को डराते-धमकाते हैं।
तीन साल पहले थे 200, लेकिन वर्तमान में सिर्फ दस लाइसेंसी
तीन साल पहले तक 200 सूदखोर रजिस्टर्ड थे, लेकिन अब एडीएम फाइनेंस के दफ्तर में सिर्फ दस ही रजिस्टर्ड साहूकार हैं। बाकी ने नवीनीकरण नहीं काया है। नियमानुसार साहूकारी में तीन साल के लिए रजिस्ट्रेशन होता है, जिसकी फीस हर साल 20 रुपये के हिसाब से 60 रुपए लगती है। हर तीन साल पर नवीनीकरण कराना जरूरी होता है।
ये है नियम
उत्तर प्रदेश साहूकारी अधिनियम 1976 के मुताबिक, साहूकारी के लिए लाइसेंस लेना जरुरी है। इसके तहत साहूकार प्रतिभूत ऋण यानी कोई वस्तु गिरवी रखकर लिए गए रुपये पर 12 से 14 प्रतिशत वार्षिक ब्याज वसूल सकते हैं।
गोला में एक ही परिवार की चार लोगों की मौत के बाद से गांव व आसपास से सूदखोर फरार हो गए है। जुआ का अड्डा भी बंद पड़ा है। घटना के बाद पुलिस जागी है तो सक्रियता नजर आने लगी है। हालांकि, यही सक्रियता अगर रोज रहती तो न तो सूदखोर नजर आते और न ही जुआ का खेल होता है। शायद इंद्र बहादुर का परिवार भी इस दलदल में फंसकर पूरे परिवार को नहीं उजाड़ता।
केस एक
06 फरवरी 2018 को इसी देवकली गांव के निवासी ऋतुराज शर्मा ने भी अपने दो बेटियों को फंदे से लटकाकर फिर खुदकुशी की थी। वह भी कर्ज लेकर सूदखोरों से परेशान था और गांव छोड़कर गोरखनाथ इलाके के पचपेड़वा में अपने परिवार के साथ रहता था। गांव के सूदखोर वहां भी परेशान करते थे। इसके बाद ही उसने बेटी नैना (4) और निरुपमा (3) को फंदे पर लटकाने के बाद खुदकुशी कर ली थी। ऋतुराज के पिता रमेश शर्मा देवकली गांव में ही रहते हैं।
केस दो
चार फरवरी 2019 को राजघाट इलाके में गल्ला व्यापारी रमेश गुप्ता ने पत्नी सरिता, बेटी पायल, रचना और बेअे आयुष को जहर देकर मार दिया और फिर खुद ट्रेन के आगे कूदकर खुदकुशी कर लिए थे। उस समय एक बेटी अस्पताल में दो दिन तक जिंदा भी थी, जिसने सूदखोरों के बारे में पुलिस को जानकारी दी थी। पुलिस ने तब केस दर्ज कर कार्रवाई भी की थी, लेकिन बाद में फिर सूदखोरों को भूल गई।