जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे अंडरग्राउंड क्राइम में सक्रिय सभी माफिया अपने सिर्फ 10 नजदीकियों से ही मिल सकते हैं। मुलाकातियों के नाम को उन्हें पहले ही बताना होगा और फिर सत्यापन के बाद ही मुलाकात की अनुमति दी जाएगी। सभी मुलाकातियों के नाम रजिस्टर में दर्ज होंगे और एलआईयू की मौजूदगी में ही मुलाकात कराई जाएगी।
पुलिस ने माफिया पर शिकंजा कसने के लिए जेल प्रशासन से वार्ता की थी, जिसके बाद जेल प्रशासन ने सभी माफिया के मुलाकात के नियमों को सख्त कर दिया है। खबर है कि इसके नियम के बाद माफिया से मिलने को अपने करीबी भी तैयार नहीं हो रहे हैं।
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जेल में बंद माफिया अजीत शाही और राकेश यादव के मुलाकातियों पर पुलिस ने शिकंजा कस दिया है। आलम यह है कि पुलिस अफसरों ने अब अपने ही पुलिस वालों पर भी भरोसा कम कर दिया है। इसकी वजह माफिया से उनकी सांठगांठ है। अब अगर विवेचक को भी माफिया से मिलना होता है तो उसे भी इस रजिस्टर में अपना नाम और उद्देश्य दर्ज कराना पड़ता है। जेल अधीक्षक ओपी कटियार बताते हैं, जेल में सीसी टीवी कैमरे लगे हैं। जेल प्रशासन की बदमाशों पर नजर होती है। किसी को भी मनमानी करने का मौका जेल प्रशासन नहीं देता है।