वेल्ड इंडिया के निदेशक आरएन सिंह ने कहा कि कोरोना काल से अर्थव्यवस्था की रुकी रफ्तार को फिर से बढ़ाने के लिए प्रयास किया है। इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए 2.27 लाख करोड़ खर्च करने का प्रावधान है, जो पिछले वित्तीय वर्ष से ज्यादा है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को विकसित करने के लिए 15700 करोड़ का प्रावधान है जो पिछली बार से दोगुना है। इससे एमएसएमई सेक्टर के उद्योगों को मजबूती मिलेगी। इनकम टैक्स स्लैब में कोई परिवर्तन न करने से आम आदमी एवं मध्य वर्ग को निराशा हाथ लगी है।
कस्टम ड्यूटी कम होने से बाजार पकड़ेगा रफ्तार
विनायक उद्योग के निदेशक आशीष खेतान ने कहा कि आयरन, कॉपर स्क्रैप, सोना चांदी पर कस्टम ड्यूटी घटने से राहत मिलेगी। इससे जुड़े उद्योगों को फायदा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि कच्चे माल की कीमतें बढ़ने से उत्पादन लागत में बढ़ोतरी हो गई थी। वहीं उत्पादों की खरीद नहीं हो रही थी। कस्टम ड्यूटी कम होने से उत्पादन लागत कम होगी और बाजार रफ्तार पकड़ेगा। इसका उद्यमियों को काफी समय से इंतजार था। बजट में इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव की उम्मीद थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
उद्योगों को राहत देने वाला बजट
पारले के निदेशक महेश रूंगटा ने कहा कि उद्योग के लिए बजट काफी हद तक राहत देने वाला है। एमएसएमई सेक्टर के लिए पैकेज की घोषणा की गई है, लेकिन इसका फायदा उद्यमियों को किस ढंग से मिलने वाला है इसका इंतजार रहेगा। बजट में स्वास्थ्य, आधारभूत ढांचे के विकास पर फोकस है। रोजगार बढ़ने के अवसर हैं। मध्यम आय वाले परिवार पर कोई राहत न देना निराश करता है।
आयकर के सरलीकरण के लिए उठाए गए कदम
दीवान पैकेजिंग प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक सुमित कक्कड़ ने कहा कि आयकर के सरलीकरण की दिशा में उठाया गया कदम बजट की सबसे बड़ी खासियत है। वहीं, 75 वर्ष से ज्यादा आयुवर्ग के लिए आईटीआर से छूट देना एक तरह से सामाजिक दायित्व निभाने जैसा है। कोरोना संकट की मार झेल रहे उद्योगों को थोड़ी और राहत देने की आवश्यकता थी। इसके लिए न सिर्फ उत्पादन लागत बढ़ाने बल्कि खपत बढ़ाने की दिशा में भी कदम उठाना चाहिए था।