बिग शॉप के निदेशक विकास अग्रवाल ने कहा कि व्यक्तिगत आयकर की दरों को घटाने की जरूरत थी। इससे लोगों के हाथों में ज्यादा पैसा आता तो वह ज्यादा खर्च करते। इससे व्यापार को फायदा होता। हालांकि आर्थिक विकास की दर बढ़ेगी। डिविडेंट डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स को भी समाप्त करना चाहिए था।
स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होंगी
राय ग्रुप के निदेशक रमाकांत राय ने कहा कि आम हो या खास बजट से सभी को उम्मीद रहती है। तीन सालों से बजट में कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। कोरोना के बाद इस समय मध्य वर्ग की खरीदारी का ग्राफ काफी घटा है। हालांकि इस क्षेत्र के लिए 35 हजार करोड़ की व्यवस्था की गई है। उम्मीद है स्वास्थ्य सेवाएं और बेहतर हो जाएंगी। मध्य वर्ग को इनकम टैक्ट में कुछ राहत देने की जरूरत थी।
टैक्स स्लैब में बढ़ोतरी करनी चाहिए
वैल्यू प्लस के निदेशक गौरांग अग्रवाल ने कहा कि सरकार को टैक्स स्लैब बढ़ाना चाहिए था। महंगाई इतनी बढ़ गई है कि कई जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। जब इनकम टैक्स देते हैं, तो फिर अलग-अलग तरह का टैक्स क्यों लिया जाता है? दोहरा या तिहरा टैक्स क्यों थोपा जा रहा है? इस पर सरकार को विचार करने की जरूरत है। अलग-अलग वर्गों में कुछ लाभ देने की योजनाएं शुरू करनी चाहिए।
संगम साड़ी सेंटर के निदेशक प्रदीप टेकरीवाल ने कहा कि बजट आम आदमी के लिए विशेष होना चाहिए। सरकार ने बिजली क्षेत्र पर अपनी योजनाएं स्पष्ट कर दी हैं। कंपनियों से बिजली लोगों को ही खरीदनी होगी। साथ ही प्रीपेड मीटर पर जोर दिया गया है। हालांकि, सरकार ने बुजुर्गों के हित की सोची है।
इलाज के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा
ड्रेस लैंड के निदेशक आकाश अग्रवाल ने कहा कि कोरोना के बाद स्वास्थ्य सेक्टर में लंबी उछाल आई है। उम्मीद है कि आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवाओं कोे लिए लोगों को बहुत परेशान होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। जरूरत है देश में पढ़ाई के साथ अच्छे अस्पताल हों, ताकि लोगों को बेहतर चिकित्सा और शिक्षा मिल सके।
स्क्रैप योजना से लाभ मिलेगा
हुंडई शोरूम के निदेशक धीरज दास ने कहा कि 15 वर्ष पुरानी गाड़ियों पर स्क्रैप योजना शुरू की गई है। ठीक ही है, प्रदूषण बहुत हद तक नियंत्रित हो सकता है। साथ ही गाड़ी या अन्य ऑटोमोबाइल में बड़ी योजना या छूट नहीं मिली है। हालांकि दामों में बहुत उछाल भी नहीं आया है कि लोगों को वाहन खरीदने में परेशानी हो।
कोरोना की स्थायी रोकथाम के लिए बजट जरूरी था
डीपी हीरो मोटो कार्प के निदेशक नितिन मातनहेलिया ने कहा कि उम्मीद थी कि स्वास्थ्य सेक्टर पर सरकार अधिक ध्यान देगी। हुआ भी ऐसा ही। टीकाकरण के लिए सरकार ने 35 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश किया है। जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाने की बात कही है। कुल मिलाकर इस बार का बजट पूरी तरह कोरोना टीकाकरण को दिया जाए तो ठीक रहेगा। इसी की जरूरत थी।