गोरखपुर। बुद्ध पूर्णिमा शुक्रवार को श्रद्धा और उल्लासपूर्ण वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर शहर में कई कार्यक्रम आयोजित हुए। इन कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता रही।
राजकीय बौद्ध संग्रहालय में बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर भगवान बुद्ध के जीवन पर आधारित छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई गई। प्रदर्शनी में ईसापूर्व तृतीय शताब्दी से लेकर 19वीं शती के मध्य बने बुद्ध, बोधिसत्व, बौद्ध चिन्ह और भगवान बुद्ध के जीवन से संबंधित छायाचित्र विशेष आकर्षण के केंद्र रहे।
प्रदर्शनी का उद्घाटन मुख्य अतिथि पूर्व उप मुख्य सुरक्षा आयुक्त, पूर्वोत्तर रेलवे सुभाष चौधरी ने किया। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के जीवन की सभी महत्वपूर्ण घटनाएं यथा लुंबिनी में उनका जन्म, बुद्धगया में उनको ज्ञान प्राप्ति और कुशीनगर में महापरिनिर्वाण की घटना बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही हुई थी। संग्रहालय के उप निदेशक डाॅ. मनोज कुमार गौतम ने कहा कि आज जहां पूरा विश्व आतंकवाद और अराजकता से जूझ रहा है, वहीं शांति एवं सौहार्द बढ़ाने की दिशा में भगवान बुद्ध द्वारा प्रतिपादित धम्म के योगदान को किसी भी दशा में नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि हमें भगवान बुद्ध के बताए मार्ग पर चलने की आवश्यकता है, साथ ही उसे जीवन में आत्मसात करने की कोशिश करनी चाहिए। भगवान बुद्ध के बगैर पूरे विश्व में शांति की परिकल्पना संभव नहीं है।
इस अवसर पर परमहंस यादव, मिन्नत गोरखपुरी, रीता श्रीवास्तव, डाॅ. रेखारानी शर्मा, डाॅ. राकेश, डाॅ. आशीष श्रीवास्तव, डाॅ. ओमप्रकाश मणि त्रिपाठी, डाॅ. सरिता सिंह, कल्पनाथ, रामनरेश चौधरी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। इसीक्रम में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की ओर से क्षत्रिय भवन प्रताप सभागार तारामंडल में भगवान गौतम बुद्ध की जयंती धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम के मुख्यवक्ता इतिहासकार डॉ. दानपाल सिंह ने गौतम बुद्ध के अष्टांग मार्ग के सिद्धांतों पर प्रकाश डाला। कहा कि भगवान बुद्ध ने पुरुषों को भिक्षु और महिलाओं को भिक्षुणी बनाया। कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह, दिनेश सिंह, नरसिंह प्रसाद सिंह, इंद्रजीत चंदेल, रामदेव सिंह, रणंजय सिंह, योगेंद्र सिंह आदि ने विचार व्यक्त किए।