शाम करीब साढ़े छह बजे कुलपति ने छात्रों से मुलाकात की और फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित करने की घोषणा की। इसके बाद छात्र लौटे। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि करीब एक महीने से अधिक समय से वह परीक्षा परिणामों में त्रुटि को लेकर शिकायत कर रहे हैं लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।
कई विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल होने के बाद भी परिणाम में अनुपस्थित दिखाया जा रहा है तो किसी को एक, दो, तीन, चार अंक तक दिए गए हैं। इसी क्रम में छात्र घनेंद्र चौधरी को भी कई पेपर में फेल किया गया था। छात्र बैक पेपर को घनेंद्र की मौत से जोड़कर जांच की मांग कर रहे थे।
छात्र दोबारा यह माइनर पेपर कराए जाने की मांग कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि करीब एक हजार छात्रों की परीक्षा छूटी है। उम्मीद जताई जा रही है कि जिन छात्रों की परीक्षाएं छूटी हैं, उनकी परीक्षाएं अलग से कराने का निर्णय डीडीयू प्रशासन जल्द ही ले सकता है।
छात्रों की मांग पर फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित कर दी गई है। यह कमेटी मृतक छात्र के मामले की जांच करेगी। मामले में पुलिस से भी सहायता ली जाएगी। कमेटी में एमएमएमयूटी के दो और एक डीडीयू के प्रशासनिक अधिकारी को शामिल किया गया है। इसके अलावा कम नंबर मिलने और कॉपियों के मूल्यांकन को लेकर भी एक कमेटी पहले से ही बनाई गई है, जो मामले की जांच कर रही है:
प्रो. पूनम टंडन, कुलपति, डीडीयू