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Gorakhpur: सगे भाइयों की नदी में डूबकर हुई मौत, एक साथ बुझे घर के चिराग, आंसुओं में टपके पिता के अरमान

Tue, 07 Jun 2022 10:07 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

 गोला इलाके के बारानगर में सरयू में नहाने के दौरान रविवार को डूबे सगे भाइयों शुभम व शिवम का शव 24 घंटे बाद सोमवार को नदी में उतराते मिला। शव मिलते ही एक बार फिर घर में चीख-पुकार मच गई।
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नदी में डूबने से बाएं शुभम और दाएं शिवम की मौत हो गई। दोनों सगे भाई थे। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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गोरखपुर जिले के गोला इलाके बारानगर में सगे भाइयों शुभम यादव (20) और शिवम यादव (18) की चिता एक साथ जली तो हर आंख नम दिखी। हर दिल रोया और जुबान से एक ही बात निकली कि क्या बिगाड़ा था मां-बाप ने। मां की गोद सुनी हो गई। अब वंश को आगे बढ़ाने वाला कोई नहीं रह गया। घर का चिराग बुझा तो पिता के अरमान आंसुओं में बह गए। पिता अपने दोनों लाल को पढ़ा-लिखाकर अफसर बनना चाह रहे थे। इसीलिए लखनऊ पढ़ने के लिए भेजा था, लेकिन मौत खींचकर दोनों को गोरखपुर ले आई।  

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 गोला इलाके के बारानगर में सरयू में नहाने के दौरान रविवार को डूबे सगे भाइयों शुभम व शिवम का शव 24 घंटे बाद सोमवार को नदी में उतराते मिला। शव मिलते ही एक बार फिर घर में चीख-पुकार मच गई। शव के आसपास लोगों को जमावड़ा हो गया। मां-बाप की चीखने की आवाज सुन हर किसी की आंख नम हो जाती थी।

गांव में मातम पसर गया। किसी के घर चूल्हे नहीं जले। हर जुबान पर सगे भाइयों की मौत की चर्चा व परिवार पर टूटे पहाड़, की रही। ग्रामीणों का कहना था कि मृत शुभम व शिवम की बहनें भी नहीं हैं। दोनों ही मां-बाप की लाठी थे, जो एक साथ टूट गए।

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रविवार को नदी में डूबे थे सगे भाई
नेवादा निवासी व पूर्व प्रधान वंश बहादुर यादव अपने परिवार के साथ रविवार को सरयू नदी के किनारे पूजा करने गए थे। इसी दौरान दोनों बेटे शुभम यादव (20) और शिवम यादव (18) नदी में नहाने उतर गए। देखते ही देखते दोनों गहरे पानी में समाकर लापता हो गया। मां-बाप चिल्लाते रहे, लेकिन कुछ नहीं हुआ। बाद में मामले की सूचना एसडीआरएफ को दी गई। एसडीएफआर की तलाश भी काम नहीं आई। इसी बीच सोमवार को पता चला कि दोनों का शव नदी में उतरा रहा है।

कांपे पिता के हाथ, अचेत होकर गिरे, ममेरे भाई ने दी मुखाग्नि
बेटों का शव देख वंश बहादुर के हाथ कांप गए। वह अचेत होकर गिर पड़े और एक जगह पड़े रहे। जवान बेटों को मुखाग्नि देने की हिम्मत नहीं जुटाई। लिहाजा, ममेरे भाई ने दोनों को मुखाग्नि दी है। यह देख अंतिम संस्कार में गया हर व्यक्ति रो पड़ा।


 
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