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खसरा प्रतिरक्षण दिवस: एमआर टीके की दोनों डोज खसरे से बचाएगी, तेजी से फैलने वाला है संक्रामक रोग

Wed, 16 Mar 2022 11:29 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।

सार

सर्वेक्षण के मुताबिक 24-35 माह आयु वर्ग के 23.9 फीसदी बच्चों ने टीके की दूसरी डोज भी ले ली है। प्रादेशिक स्तर पर यह 30.2 फीसदी है।
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बूस्टर खुराक। - फोटो : Istock
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विस्तार
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मीजिल्स रुबेला (एमआर) टीके की दोनों डोज से ही खसरे से बचा जा सकता है। यह टीका स्वास्थ्य विभाग निशुल्क उपलब्ध करा रहा है। तेजी से फैलने वाले इस संक्रामक रोग से बचाव में टीकाकरण की भूमिका अहम है, क्योंकि इस बीमारी का सिर्फ लाक्षणिक उपचार उपलब्ध है। इस बीमारी से मरीज की मौत भी हो सकती है। खसरे के टीके के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 16 मार्च को खसरा प्रतिरक्षण दिवस मनाया जाता है।

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जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. एएन प्रसाद ने बताया कि खसरा ज्यादातर बच्चों को प्रभावित करता है। इसका पहला लक्षण तेज बुखार है। वायरस के संपर्क में आने के 10 से 12 दिनों के बाद बुखार की शुरुआत खांसी, सर्दी, आंखों में लालिमा और चकत्ते के साथ होती है। मरीज के खांसने, छींकने, नजदीकी संपर्क, संक्रमित नाक या गले के स्राव से बीमारी का प्रसार होता है।

यह बीमारी छोटे बच्चों में होने वाली मृत्यु और दिव्यांगता का एक प्रमुख कारण है। बताया कि कम पोषण, विटामिन-ए की कमी और एचआईवी या एड्स की स्थिति में खसरे की जटिलताएं बढ़ जाती हैं। खसरे के कारण होने वाले अंधापन, इंसेफेलाइटिस, गंभीर अतिसार और निमोनिया के कारणों से भी जटिलाएं बढ़ती हैं।
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इन स्थितियों से बचने का सबसे बेहतर उपाय है कि नौ से 12 माह की उम्र में एमआर टीके की पहली डोज, जबकि 16 से 24 माह की उम्र में दूसरी डोज अवश्य दी जाए। सभी अभिभावकों को समझना होगा कि खसरा पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मौत का एक प्रमुख कारण है। इसलिए इसका टीका नहीं छूटना चाहिए।

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85.5 फीसदी ने ली पहली डोज

राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (वर्ष 2019-21) के मुताबिक जिले के 12 से 23 उम्र वर्ग के 85.5 फीसदी बच्चों ने खसरे के टीका की पहली डोज ले ली है। प्रदेश स्तर पर यह आंकड़ा 83.3 फीसदी है। सर्वेक्षण के मुताबिक 24-35 माह आयु वर्ग के 23.9 फीसदी बच्चों ने टीके की दूसरी डोज भी ले ली है। प्रादेशिक स्तर पर यह 30.2 फीसदी है। खसरे से संपूर्ण प्रतिरक्षण टीके के दोनों डोज के बाद ही प्राप्त होता है ।

दिक्कत होने पर तत्काल करें संपर्क

जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने बताया कि न केवल बच्चों बल्कि किसी भी उम्र के व्यक्ति को बुखार एवं घमौरीनुमा बिना पानी वाली दाने व इसके साथ खांसी या नाक बहना या आंखों के लाल होने जैसे लक्षण दिखें तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं। ऐसे लोग खसरे के संभावित मरीज हो सकते हैं। खसरे से प्रभावित बच्चों में घमौरीनुमा दाने होने से दो से तीन सप्ताह के भीतर जटिलता होने की आशंका होती है। खसरे के संभावित मरीज को दाने आने के बाद चार दिनों के लिए आइसोलेशन में रखना चाहिए, लेकिन ऐसे मरीज से भेदभाव नहीं करना है।

यह भी जानिए

  • अगर 16 माह से पांच वर्ष का बच्चे ने एमआर टीके की कोई डोज नहीं ली है तो उसे नियमित टीकाकरण सत्र पर पहली खुराक तुरंत देनी है और एक महीने बाद दूसरी खुराक भी देनी है।
  • अन्य टीकों के साथ एमआर का टीका दिया जा सकता है और यह पूरी तरह से सुरक्षित है।
  • खसराग्रसित बच्चों को उम्र के अनुसार ड्यू डेट पर खसरे का टीका लगाना है।


 
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