85.5 फीसदी ने ली पहली डोज
राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (वर्ष 2019-21) के मुताबिक जिले के 12 से 23 उम्र वर्ग के 85.5 फीसदी बच्चों ने खसरे के टीका की पहली डोज ले ली है। प्रदेश स्तर पर यह आंकड़ा 83.3 फीसदी है। सर्वेक्षण के मुताबिक 24-35 माह आयु वर्ग के 23.9 फीसदी बच्चों ने टीके की दूसरी डोज भी ले ली है। प्रादेशिक स्तर पर यह 30.2 फीसदी है। खसरे से संपूर्ण प्रतिरक्षण टीके के दोनों डोज के बाद ही प्राप्त होता है ।
दिक्कत होने पर तत्काल करें संपर्क
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी ने बताया कि न केवल बच्चों बल्कि किसी भी उम्र के व्यक्ति को बुखार एवं घमौरीनुमा बिना पानी वाली दाने व इसके साथ खांसी या नाक बहना या आंखों के लाल होने जैसे लक्षण दिखें तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं। ऐसे लोग खसरे के संभावित मरीज हो सकते हैं। खसरे से प्रभावित बच्चों में घमौरीनुमा दाने होने से दो से तीन सप्ताह के भीतर जटिलता होने की आशंका होती है। खसरे के संभावित मरीज को दाने आने के बाद चार दिनों के लिए आइसोलेशन में रखना चाहिए, लेकिन ऐसे मरीज से भेदभाव नहीं करना है।
यह भी जानिए
- अगर 16 माह से पांच वर्ष का बच्चे ने एमआर टीके की कोई डोज नहीं ली है तो उसे नियमित टीकाकरण सत्र पर पहली खुराक तुरंत देनी है और एक महीने बाद दूसरी खुराक भी देनी है।
- अन्य टीकों के साथ एमआर का टीका दिया जा सकता है और यह पूरी तरह से सुरक्षित है।
- खसराग्रसित बच्चों को उम्र के अनुसार ड्यू डेट पर खसरे का टीका लगाना है।