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गोरखपुर में नवजात का शव मिलते ही डीजीपी की गाइडलाइंस का उल्लंघन, नहीं दर्ज हुआ केस

Sat, 01 Feb 2020 11:23 AM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, पीपीगंज (गोरखपुर)।

सार

  • पुलिस बोली, शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा - रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई
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विस्तार
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इलाके के हरपुर ग्रामसभा में पोखरे किनारे झाड़ी में नवजात का शव मिला। उसे कपड़े में लपेटकर फेंका गया था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। हालांकि पुलिस ने इस मामले में कोई केस दर्ज नहीं किया है, जबकि ऐसे प्रकरण के लिए डीजीपी ने गाइड लाइन जारी की थी और इसके पहले एसएसपी के आदेश पर दो केस दर्ज भी किए जा चुके हैं।
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जानकारी के मुताबिक हरपुर गांव के पोखरे किनारे कुछ लोग जानवर ले गए थे। झाड़ी के पास कपड़े में लपेटकर फेंके गए नवजात के शव को लोगों ने देखा। उसकी जानकारी पुलिस को दी गई। पुलिस आई और शव को पोस्टमार्टम तो भेजा। हालांकि केस नहीं दर्ज किया गया। वैसे पुलिस की जांच में कुछ तथ्य सामने आए हैं। सूत्र बताते हैं कि नवजात को किसने फेंका था, उस बारे में पुलिस को अहम सुराग मिला है। बताया जा रहा है कि वह इलाके की एक अविवाहित युवती की बच्चा है। थानाध्यक्ष पीपीगंज राजप्रकाश सिंह ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। अभी मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है।

बेमन से दर्ज किया मुकदमा, कार्रवाई कुछ भी नहीं

नवजात के पाए जाने पर केस दर्ज करने का प्रावधान है। वादी न मिलने पर पुलिस खुद की तहरीर पर कार्रवाई करे, यह भी नियम में है। बावजूद इसके, पुलिस इसे लेकर कोई पहल नहीं करती है। इसके लिए डीजीपी का आदेश आने के बाद एसएसपी डॉ. सुनील कुमार गुप्ता ने सख्ती की तो दो मामलों में गोला और चौरीचौरा थाने में केस दर्ज किया गया। दोनों जगह 19 नवंबर को केस दर्ज किया, मगर कार्रवाई कुछ भी नहीं हो सकी।

जिस तरह से पुलिस ने बेमन से केस दर्ज किया था, उसी तरह का नतीजा भी सामने है। पुलिस केस दर्ज करने के बाद सिर्फ आसपास के चंद लोगों से पूछताछ करके रह गई। यही वजह है कि जन्म से ही अनाथ हो गए बच्चों को न्याय नहीं मिल सका है। हालांकि पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है। कुछ ऐसा ही जीआरपी थाने में दर्ज केस का भी हुआ है। नवजात के पाए जाने के मामले में जिले का सबसे पहला केस जीआरपी गोरखपुर में दर्ज हुआ था, लेकिन इस मामले में भी पुलिस कुछ नहीं कर सकी है।
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धारा 317 आईपीसी

माता-पिता या नवजात की देखरेख करने वाले व्यक्ति की ओर से 12 वर्ष से कम आयु के बच्चे का परित्याग करना अपराध है।
सजा : सात साल की कैद या फिर जुर्माना या फिर दोनों।

धारा 318 आईपीसी
पैदाइश छुपाने के लिए नवजात को गोपनीय तरीके से जीवित अथवा मृत फेंकना अपराध है।
सजा : दो साल की कैद या जुर्माना या फिर दोनों।
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