इसी प्रकार 13 भाजपा विधायकों ने भी सीएम को पत्र लिखकर प्रहरी एप को हटाने की मांग की है। इसमें एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह, मलिहाबाद से विधायक जय देवी, बस्ती जिले के महादेवा के विधायक रवि सोनकर, रूधौली के विधायक संजय प्रसाद जायसवाल, कुशीनगर के फाजिलनगर से विधायक गंगा कुशवाहा, महराजगंज के नौतनवां से विधायक अमन मणि त्रिपाठी, देवरिया के भाटपार रानी के विधायक आशुतोष उपाध्याय, बलिया के विधायक उमाशंकर सिंह आदि शामिल हैं। (संवाद)
शहर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद रवि किशन ने कहा कि कुछ लोग अपनी समस्या बताने आए थे। इस समस्या से शासन को अवगत करा दिया है। शासन को अंतिम फैसला लेना है। जो भी फरियाद लेकर आता है उसे जरूरत सुनते हैं फिर समस्या से शासन को अवगत कराते हैं।
कैंपियरगंज विधायक फतेहबहादुर सिंह ने कहा कि हम जनता द्वारा चुने गए हैं और जनता के लिए काम करते हैं। जो भी फरियाद लेकर आता है, उसकी समस्या सुनते हैं। संबंधित प्रकरण शासन स्तर पर तय होना है। प्रहरी एप को लेकर पत्र लिखा गया है।
जानकारी के मुताबिक, लोक निर्माण विभाग ने टेंडर प्रक्रिया को बेहतर बनाने की बात कह कर बीते 16 सितंबर से प्रहरी एप की व्यवस्था को लागू किया है। इसमें ठेकेदार ऑनलाइन टेंडर डालेंगे। टेंडर में जो भी पेपर मांगे गए हैं, उसे ऑनलाइन भरना होगा। इसके बाद प्रहरी एप तय करेगा कि कौन ठेकेदार किस काम के लिए योग्य है।
विभाग का कहना है कि पहले टेंडर में इंजीनियर की अहम भूमिका होती थी। वह जिसे चाहते थे, टेंडर दे देते थे। जिसे नहीं चाहते थे, आवेदन में कई खामियां बताकर प्रतिस्पर्धा से बाहर कर देते थे। इसको लेकर शिकायतें शासन तक पहुंचती थीं। विभाग का कहना है कि प्रहरी एप से टेंडर में पारदर्शिता आएगी।
ठेकेदारों की चिंता यह
ठेकेदारों का कहना है कि प्रहरी एप में जो शर्तें निर्धारित हैं, उसे पांच करोड़ तक का काम कराने वाला ठेकेदार पूरा नहीं कर सकता। शर्त में कहा गया है कि ठेके के काम में प्रयोग होने वाली सभी मशीनें पांच साल से अधिक पुरानी नहीं होनी चाहिए, जबकि विभाग की कई मशीनें जैसे प्लांट, रोलर आदि अंग्रेजों के जमाने की हैं। एक दूसरी शर्त यह है कि सड़कों पर काम कराने वाला तकनीकी स्टाफ जेई व एई, हर सड़क के लिए अलग-अलग होना चाहिए। इसके अलावा हर विभाग में टेंडर के समय जमानत राशि दो प्रतिशत निर्धारित है, यहां 10 प्रतिशत कर दिया गया है।