केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को लेकर अचानक सियासी गलियारे में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा इन्हें प्रदेश में पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी में है। उनके चेहरे पर दांव लगाने का मकसद आगामी विधानसभा चुनाव में सपा के पीडीए के दांव को कमजोर करने की कोशिश भी मानी जा रही है।
पंकज कुर्मी (ओबीसी) समुदाय से आते हैं, जो यूपी में एक बड़ा और महत्वपूर्ण वोट बैंक है। यूं तो पार्टी में पहले से ही कई बड़े ओबीसी चेहरे हैं पर पंकज पर दांव नई ऊर्जा और सोच ला सकती है।
पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष नेतृत्व में इनकी अच्छी पकड़ और सबके लिए उपलब्ध होने वाले नेता की छवि के कारण इस पद के लिए दावेदार अन्य नेताओं की तुलना में उन्हें ज्यादा मजबूत चेहरा माना जा रहा है।
एक साल बाद ही यूपी में विधानसभा चुनाव
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव 14 दिसंबर को होना है। करीब एक साल बाद ही यूपी में विधानसभा चुनाव भी होने हैं। ऐसे में पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के चेहरे से राजनीतिक मैसेज भी देना चाहती है।
लोकसभा चुनाव में यूपी में पार्टी के खराब प्रदर्शन के पीछे सपा के पीडीए का दांव सफल होना माना जाता है। ऐसे में अगले चुनाव में भाजपा पिछड़े वर्ग के मतदाताओं में फिर से अपनी पकड़ वापस पाना चाहती है। इसके लिए पंकज चौधरी नाम का सियासी तीर भी उनकी तरकश में है, जो पार्टी के मिशन-2027 में फायदेमंद हो सकता है।
केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी का नाम चर्चा में आने से महराजगंज के खाटी भाजपा कार्यकर्ताओं में खुशी है। पार्टी कार्यकर्ताओं का मानना है कि पंकज चौधरी का ओहदा पार्टी में हमेशा ठीक रहा है। यही वजह है कि चुनाव में भी पार्टी ने इन्हीं पर हर बार भरोसा जताया।
पिछड़े समाज में इनकी मजबूत पकड़ के अलावा संगठन में इनको लेकर कभी गतिरोध सामने नहीं आया। शुरुआत से ही पार्टी की ओर से मिली जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन कर आगे बढ़ते चले गए।
इनके विरोधी भी इनके व्यक्तित्व की सराहना करते हैं। सात बार सांसद होने के बाद भी जनता से इनकी नजदीकी कम नहीं हुई। कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करने में भरोसा रखते हैं। राजनीति के जानकार बताते हैं कि अपना दल व अन्य सहयोगियों से परंपरागत कुर्मी वोट को अपने ओर आकर्षित करने में पंकज चौधरी काफी मददगार साबित हो सकते हैं।
संघ से इनकी नजदीकी के साथ ही पार्टी के कैडर वाले नेताओं के भी प्रिय माने जाते हैं। यह अपनी कुशल रणनीति का नमूना भी चुनाव में दिखा चुके हैं। यह प्रदेश में पिछड़े समाज के काफी मजबूत नेता माने जाते हैं।
भाजपा कार्यकर्ता डॉ. शांति शरण मिश्र कहते हैं कि यह महराजगंज के लिए गौरव का विषय होगा। पार्टी केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री को जिम्मेदारी सौंपेगी तो इसका लाभ मिलेगा। उन्होंने बताया कि गीता प्रेस के शताब्दी समारोह में आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिना कार्यक्रम और प्रोटोकॉल को तोड़कर पंकज चौधरी के घर जाकर उनका कद बढ़ा दिए थे।
उनके घर जाने के लिए पीएम मोदी को संकरी गलियों से पैदल जाना पड़ा था। पीएम मोदी की इस तवज्जो ने पूर्वी उत्तर प्रदेश में पंकज का कद बढ़ा दिया और कुर्मी बिरादरी में उनकी पकड़ और मजबूत हो गई।
पार्षद के तौर पर शुरू किया राजनीति का सफर
15 नवंबर 1964 को जन्मे गोरखपुर के उद्योगपति स्वर्गीय भगवती चौधरी एवं पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष उज्ज्वल चौधरी के छोटे सुपुत्र पंकज चौधरी ने गोरखपुर नगर निगम के पार्षद के तौर पर 1989 में राजनीति का सफर शुरू किया। वर्ष 1990 में ही भारतीय जनता पार्टी की जिला कार्य समिति सदस्य हुए।
10वीं लोकसभा में वर्ष 1991 में महराजगंज संसदीय सीट से भाजपा के टिकट पर सांसद चुने गए। 11 वीं और 12 वीं लोकसभा में वर्ष 1996, 1998 में सांसद चुने गए। 1999 में सपा के अखिलेश से हार मिली पर 2004 में फिर निर्वाचित हुए। 2009 में कांग्रेस के स्वर्गीय हर्षवर्धन से हार मिली। 2014 से लगातार लोकसभा के सदस्य हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चुनाव के लिए 464 मतदाताओं की सूची हुई जारी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के बहुप्रतीक्षित चुनाव के लिए शुक्रवार को मतदाता सूची जारी कर दी गई। इसमें कुल 464 मतदाता शामिल हैं। इनमें 5 सांसद, 26 एमएलए, आठ एमएलसी व 425 प्रांतीय परिषद के सदस्य व जिला अध्यक्ष हैं। पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री व केंद्रीय चुनाव पर्यवेक्षक विनोद तावड़े की देखरेख में शनिवार को नामांकन पत्र भरे जाएंगे।
चुनाव संपन्न कराने के लिए दोनों उप मुख्यमंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रदेश संगठन के चुनाव अधिकारी व पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने शुक्रवार को प्रदेश अध्यक्ष चुनाव का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया। 13 दिसंबर को नामांकन पत्र दोपहर दो से तीन बजे तक दाखिल किए जाएंगे।
कुर्मी बिरादरी में है पकड़
कुर्मी समाज में उनकी मजबूत पकड़ और अन्य बिरादरियों में प्रभाव ने उन्हें जिले की राजनीति में मजबूत चेहरा बनाया है। कुर्मी बिरादरी में अच्छी पकड़ के साथ अन्य बिरादरी में भी उनके सोशल इंजीनियरिंग के विरोधी भी कायल हैं। गोरखपुर से अलग होकर जब महराजगंज जिला बना, तब से जिला पंचायत पर भाजपा का वर्चस्व कायम है। उनके भाई प्रदीप चौधरी और मां उज्ज्वला चौधरी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं। आरक्षण में बदलाव के बाद भी उनके विश्वसनीय सहयोगी ही इस पद पर चुने जाते रहे हैं, जो उनकी राजनीतिक रणनीति की सफल भूमिका को दर्शाता है।
जन्म और पृष्ठभूमि
गोरखपुर के हरिवंश गली शेखपुर निवासी पंकज चौधरी का जन्म 20 नवंबर 1964 को भगवती प्रसाद चौधरी के घर हुआ। वे गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक हैं। परिवार में पत्नी भाग्यश्री, बेटा रोहन चौधरी और एक बेटी शामिल हैं।
राजनीतिक सफर
1989-91 सदस्य, नगर निगम, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश।
1990-91 उप महापौर, नगर निगम, गोरखपुर।
1990- सदस्य, कार्य समिति, भारतीय जनता पार्टी।
1991- 10वीं लोकसभा के लिए चुने गए। (पहला कार्यकाल)
1991-96 सदस्य, पटल पर रखे गए कागजात संबंधी समिति और सदस्य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण और वन संबंधी समिति।
1998-12वीं लोकसभा के लिए फिर से निर्वाचित
2004-14वीं लोकसभा के लिए फिर से निर्वाचित
2014- 16वीं लोकसभा के लिए फिर से निर्वाचित
2019- 17वीं लोकसभा के लिए फिर से निर्वाचित
2019- 17वीं लोकसभा के लिए फिर से निर्वाचित
2024- 18वीं लोकसभा के लिए फिर से निर्वाचित
पंकज चौधरी केवल 1999 और 2009 में हारे
2021 से केंद्र की मोदी सरकार में लगातार मंत्री।