डॉ. प्रशांत ने बताया कि चार किलो गुठली को सुखाकर पीसने पर एक किलो पाउडर बनता है। इसे फिल्टर पेपर पर रखकर बीकर में रख देते हैं। उसके नीचे एक हीटर रहता है, जिसमें 400 ग्राम एन हेड्रेन को रखकर 70 डिग्री पर गर्म करते हैं। गर्म होकर वह ऊपर कंडेसर के माध्यम से बूंद बूंद कर पाउडर में छनकर गिरता है। फिर से डिस्टिलाइजेशन सेटअप में 70 डिग्री पर गर्म करते हैं। इससे एन हेक्जेन अलग हो जाता है। जो तरल पदार्थ बचेगा वह क्रूड मैंगो ऑयल है।
दूसरी बार में बनेगा बायोडीजल
दूसरी प्रक्रिया में कुल तरल पदार्थ की मात्रा का .1 प्रतिशत एनएओएच या केओएच व कुल मात्रा का पांच प्रतिशत मेथेनॉल मिलाकर ट्रांसइस्टिरीफिकेशन के माध्यम से रोट्रेट करते हैं। इस प्रक्रिया में करीब 200 एमएल बायोडीजल प्राप्त होता है।