घाव को भरने वाले बायोडिग्रेडेबल बायोकॉम्पोजिट को किया विकसित
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर के यांत्रिक अभियंत्रण विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनोज कुमार गुप्ता को वुंड-हीलिंग (घावों के उपचार के लिए बायोडिग्रेडेबल बायोमैटेरियल) के लिए पेटेंट प्रदान किया गया है। इसको निधि मिश्रा, शगुन वर्श्नेय, अमरध्वज, अमित प्रभाकर तथा डॉ. मनोज के गुप्ता की शोध टीम ने विकसित किया है।
यह तकनीक मरीजों के घाव भरने में आने वाली चुनौती माइक्रोबियल इंफेक्शन की रोकथाम पर केंद्रित है। शोधकर्ताओं ने ग्रीन सिंथेसाइज्ड सिल्वर नैनोपार्टिकल्स और नैनोसेलुलोज को पॉली मैट्रिक्स में सम्मिलित कर एक बायोडिग्रेडेबल बॉयोकंपोजिट विकसित किया है।
यह पेटेंट हमारे शिक्षकों द्वारा किए जा रहे उच्च गुणवत्ता वाले शोध और नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण है
- प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा, कुलपति, एमएमएमयूटी