घेराव के समय विभागाध्यक्ष ने बताया कि 2004 से कॉलेज में मैनेजमेंट कोटे से प्रवेश हो रहा है। पहली बार इस तरह की समस्या सामने आई है कि परीक्षा नहीं कराई जा रही है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन ने जब-जब कोई दस्तावेज मांगा, उपलब्ध कराया गया। बावजूद इसके विद्यार्थियों को परीक्षा देने की अनुमति नहीं मिली, जो गलत है। परीक्षा पत्र जारी न करते हुए उन्हें परीक्षा देने से वंचित कर दिया गया।
विश्वविद्यालय प्रशासन की दलील
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि अल्पसंख्यक महाविद्यालय में भी प्रवेश के बाद सभी पाठ्यक्रमों की तरह बीएड के विद्यार्थियों के प्रवेश का सत्यापन भी विश्वविद्यालय द्वारा किया जाता है। लेकिन, सेंट एंड्रयूज डिग्री कॉलेज द्वारा परीक्षा के एक दिन पहले, वह भी रात में बीएड के विद्यार्थियों की प्रवेश फाइल विश्वविद्यालय को भेजी गई। इसके अलावा विद्यार्थियों की 75 प्रतिशत कक्षा में उपस्थिति भी महाविद्यालय द्वारा सुनिश्चित नहीं कराई गई है।
गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने कहा कि छात्रों के हितों को संरक्षित करने तथा उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया गया है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जिन विद्यार्थियों का प्रवेश नियमानुसार लिया गया है, उनकी परीक्षा जल्द कराई जाएगी।