- आरोपी के खिलाफ 36 घंटे में शहर के चार थानों में दर्ज हुआ था केस
- बीजेपी विधायक के भाई भोलेंद्र ने सपा के प्रतिनिधिमंडल से मिलने से कर दिया था इन्कार
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। मुख्यमंत्री और उनके ओएसडी पर अभद्र टिप्पणी के आरोप में जेल भेजे गए भोलेंद्र पाल सिंह को बृहस्पतिवार को कोर्ट से जमानत मिल गई। एक-दो दिन में जेल से रिहाई हो सकती है। जेल में बंद रहते हुए भोलेंद्र ने अपनी गलती मान ली थी और मुख्यमंत्री पर भरोसा जताया था। भोलेंद्र पिपराइच विधायक महेंद्र पाल सिंह के भाई हैं।
28 अगस्त की रात भोलेंद्र ने फेसबुक पर एक पोस्ट डालकर राजनीतिक हलचल तेज कर दी थी। उन्होंने इस पोस्ट में मुख्यमंत्री और उनके ओएसडी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की थी। यह विवाद स्व. केदार सिंह की प्रतिमा को जमीन से हटाने की चर्चा के बीच उभरा था। पोस्ट वायरल होते ही 36 घंटे के भीतर उनके खिलाफ सात केस दर्ज कराए गए। ये केस साइबर थाना, रामगढ़ताल, चिलुआताल और पिपराइच थानों में दर्ज हुए थे। इसके अलावा आबकारी विभाग की कार्रवाई में उनके ईंट-भट्ठे से कच्ची शराब मिलने पर आबकारी एक्ट में भी केस लिखा गया था। पुलिस ने मामले में भोलेंद्र को जेल भिजवा दिया था। उनके छोटे भाई रामशंकर सिंह ने पुष्टि की है कि कोर्ट से जमानत मिलने के बाद आवश्यक औपचारिकताओं के पूर्ण होते ही भोलेंद्र की रिहाई हो जाएगी।
सपा के प्रतिनिधिमंडल से मिलने से कर दिया था इन्कार
जेल में भोलेंद्र से सपा का एक प्रतिनिधिमंडल मिलने आने वाला था। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय की अगुवाई में गठित इस दल में सांसद रामभुआल निषाद और रामप्रसाद चौधरी भी शामिल थे। लेकिन भोलेंद्र ने जेल प्रशासन को पत्र भेजकर साफ कहा कि वे किसी भी राजनीतिक दल के प्रतिनिधिमंडल से नहीं मिलना चाहते हैं।