गोरखपुर। गोरखनाथ मंदिर में राम कथा के छठवें दिन मंगलवार को कथावाचक आचार्य शांतनु ने महाराज भरत के चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भरत का चरित्र पवित्र तीर्थ के जल के समान है, जिसका श्रवण मनुष्य के जीवन को पावन बना देता है।
राम कथा का समापन बुधवार को होगा। कथावाचक ने कहा कि भरत त्याग की प्रतिमूर्ति हैं। राज्य मिलने पर भी उन्होंने उसे स्वीकार नहीं किया और श्रीराम की चरण पादुकाओं को सिंहासन पर स्थापित कर स्वयं नंदीग्राम में तपस्वी जीवन व्यतीत किया। आज धार्मिक आयोजन केवल औपचारिकता न बनें, बल्कि उनके माध्यम से जीवन में परिवर्तन आए और समाज में आपसी प्रेम व सौहार्द बढ़े।
मनुष्य को अपने भीतर के दोषों और दुर्गुणों का त्याग करना चाहिए। साहस, सदाचार और प्रभु के प्रति समर्पण ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है। राम शरणागत की सदैव रक्षा करते हैं। कथा के विश्राम पर व्यास पीठ की आरती उतारी गई।
इस अवसर पर गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, कालीबाड़ी के महंत रविंद्र दास, बाबा बालकदास, डॉ. अरविंद कुमार चतुर्वेदी, व्यापारी कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष पुष्पदंत जैन, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष कामेश्वर सिंह, रामजन्म सिंह, डॉ. प्रदीप राव, यजमान बैजनाथ जायसवाल सहित काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।ी