महराजगंज। पनीर खरीदते समय क्या आपने उसकी शुद्धता की जांच की है? अगर नहीं, तो सावधान हो जाइए! क्योंकि सहालग का सीजन आते ही मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं। चंद रुपयों के लालच में वह आपकी सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। सामान्य दिनों में जिस पनीर की खपत 5 से 7 क्विंटल होती थी सहालग में मांग बढ़ने से 10 क्विंटल होने लगी है।
सहालग को लेकर बाजार में दूध और पनीर की मांग बढ़ गई है। इसका फायदा उठाने के लिए मिलावट करने वाले धंधेबाज सक्रिय हो गए हैं। पाउडर और पैकेट के दूध में अरारोट मिलाकर बने पनीर सस्ते दर पर धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं। मिलावट के इस खेल में सेहत को सुरक्षित रख पाना मुश्किल हो गया है। आश्चर्य की बात तो यह है कि रकम खर्च करने के बाद भी लोग शुद्ध खाद्य पदार्थ नहीं पा रहे हैं।
इसकी पूर्ति के लिए एक लाख लीटर पैकेट का दूध आता है। शेष पूर्ति मिलावट के सहारे होती है।
डेयरी विकास बोर्ड के प्रभारी उमाशंकर शर्मा ने बताया कि डेरी बढ़ाने की जरूरत है। तभी मांग की पूर्ति हो सकती है। उन्होंने बताया कि 70470 गाय व 190630 भैंस हैं। उत्पादन कम और खपत अधिक होने का ही लाभ धंधेबाज उठाते हैं। ि