बीआरडी मेडिकल कॉलेज में टीबी मरीज बच्ची को दवा देते प्राचार्य डॉ गणेश कुमार।
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गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एमडीआर टीबी मरीजों के लिए नई दवा बेडाक्विलिन उपलब्ध है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग एक लाख है। यह दवा 18 साल से कम उम्र के बच्चों में नहीं दी जा सकती है। ऐसे में बच्चों के एमडीआर टीबी का इलाज बहुत ही कठिन था। वहीं अब बीआरडी में एमडीआर टीबी के इलाज के लिए नई दवा की शुरूआत की गई है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार द्वारा विभागाध्यक्ष पलमोनरी मेडिसिन विभाग डॉ. अश्विनी मिश्रा के उपस्थिति में बच्चों के एमडीआर टीबी के लिए बेडाक्विलिन नामक नई दवा का शुभारंभ किया गया। महाराजगंज एवं गोरखपुर के एक-एक एमडीआर टीबी के मरीजों को प्राचार्य ने अपने हाथों से दवा खिलाकर इस दवा को गोरखपुर मंडल में लांच किया। इस उपलक्ष्य में प्राचार्य एवं विभागाध्यक्ष ने एक-एक टीबी के मरीजों को गोद भी लिया।
बच्चों के एमडीआर टीबी के इलाज के लिए अब बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर में बेडाक्विलिन नामक नई दवा उपलब्ध हो गई है। इस दवा का अनुमानित लागत एक लाख रुपए है जो कि सरकार द्वारा मुफ्त में एमडीआर टीबी से ग्रसित बच्चों को उपलब्ध कराई जाएगी। यह नई दवा 100 फीसदी कारगर है, इसमें अब तक कोई भी रेजिस्टेंस देखने को नहीं मिला है।
यह दवा गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के अलावा सिर्फ लखनऊ एवं आगरा मेडिकल कॉलेज में उपलब्ध है। प्राइवेट सेक्टर में यह दवा कहीं उपलब्ध नहीं है। यह दवा जापान में बनती है तथा वहीं से मरीजों के लिए भारत सरकार द्वारा निर्यात की जाती है। खास बात ये है कि अभी तक इसका कोई गंभीर साइड इफेक्ट देखने को नहीं मिला है।