रसायन विज्ञान का विशेष कोर्स कर वाटर प्रिंटिग में हुआ माहिर
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बिहार में नकली स्टांप छापने वाले गिरोह से पूछताछ में सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। जांच में पता चला है कि गिरोह के सरगना कमरुद्दीन के नाती साहेबजादे ने कंप्यूटर के अलावा रसायन विज्ञान का एक विशेष कोर्स भी किया था, जिससे उसे केमिकल की जानकारी हो गई थी। एक एप का इस्तेमाल करके वह वाटर प्रिंटिंग का माहिर हो गया था। इसी का फायदा वह स्टांप को बारीकी से तैयार करने के साथ ही नकली नोट बनाने में उठाता था। उसके द्वारा तैयार किए जाने वाले नोट को पकड़ पाना आसान नहीं था, क्योंकि उसके सिक्योरिटी फीचर को वह पूरी तरह से हूबहू तैयार कर देता था। अब पुलिस की जांच स्टांप के साथ ही नकली नोट तक भी पहुंच गई है।
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पटना का ही युवक ही देता था नोट का कागज या कोई और भी शामिल
नकली नोट का मामला सामने आने के बाद अब पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि स्टांप का कागज मुहैया कराने वाला युवक ही नकली नोट के लिए कागज भी उपलब्ध कराता था या इसमें कोई और शामिल है। पुलिस का कहना है कि स्टांप का कागज देने वाले युवक को गिरफ्तार कर लिया जाए तो यह मामला साफ हो जाएगा। उसी से पूछताछ के बाद इसका पूरा भेद सामने आएगा।
यह है मामला
गोरखपुर के फर्जी स्टांप का मामला सामने आने के बाद कैंट थाने में केस दर्ज किया गया है। इसी की जांच करते हुए पुलिस बिहार तक पहुंची और फिर सिवान जिले के मोफस्सिल थाना क्षेत्र के नई बस्ती निवासी मोहम्मद कमरुद्दीन, उनका नाती साहेबजादे, गोरखपुर के कोतवाली थाना क्षेत्र के समय माता मंदिर के पास रहने वाला रामलखन जायसवाल, कुशीनगर के कसया थाना क्षेत्र के जानकीनगर निवासी ऐश मोहम्मद, कुशीनगर के पडरौना के सिरसिया निवासी रविंद्र दीक्षित, देवरिया के भाटपार थाना क्षेत्र के वार्ड नंबर 22 निवासी संतोष गुप्ता और पडरौना के बकुलहा निवासी नंदू उर्फ नंदलाल को गिरफ्तार कर लिया। इनके पास से एक करोड़ रुपये से अधिक के नकली स्टांप भी बरामद हुए हैं। अब पुलिस नकली नोट की जांच कर रही है।