विद्यालय के दूसरे बच्चों को पीटी सिखाते संतोष कुमार।
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आठ साल के संतोष कुमार के सपनों को बेसिक शिक्षा विभाग बुधवार को कृत्रिम पैर देगा। एक हादसे में अपना बायां पैर और हाथ गंवाने वाला संतोष चार साल बाद इसकी मदद से दोबारा चल सकेगा। मंगलवार को संतोष को कृत्रिम पैर लगाने का आखिरी ट्रायल किया गया। बुधवार को कृत्रिम पैर लगाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
बेसिक शिक्षा विभाग में मंगलवार को पिता रामबचन के साथ पहुंचे कक्षा दो के छात्र संतोष से जब कृत्रिम पैर के बारे में अमर उजाला संवाददाता ने बात की तो संतोष तपाक से बोल पड़ा। ‘... अब पीटी कईले में कौउनो दिक्कत नाई होई। एगो गोड़ से करत क तनी परेशानी होत रहल’।
चार साल की उम्र में संतोष कुमार एक ट्रेलर की चपेट में आ गया था। हादसे में उसने अपना बायां पैर और हाथ गवां दिया। जान बची मगर दिव्यांगता के दंश से पूरा बचपन तबाह हो गया। बच्चे का हौसला न टूटे इसलिए मजदूर पिता रामबचन ने संतोष का दाखिला जंगल कौड़िया ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय डोहरिया बाजार में करा दिया। स्कूल में दूसरे बच्चों को पीटी करता देख संतोष के मन में भी उसे करनी की लालसा जगी। एक पैर और हाथ के बल पर कुछ दिनों में धीरे-धीरे वह पीटी करना सीख गया। अब वह आगे खड़े होकर विद्यालय के दूसरे बच्चों को पीटी करना भी सिखाता है।