गोरखपुर। गुलरिहा इलाके में कॉल सेंटर खोलकर ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिये करोड़ों रुपये की साइबर ठगी के मामले में आरोपी आईडीएफसी बैंक के मैनेजर का पता जांच में फर्जी निकला है। बैंक ने महाराष्ट्र का पता दिया था जो पुलिस की जांच में फर्जी निकला है। पुलिस ने मैनेजर के साथ ही कैशियर को भी नोटिस भेजा है। अब जल्द ही दोनों की गिरफ्तारी हो सकती है।
जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2025 में गुलरिहा पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिये सट्टेबाजी कर करोड़ों की जालसाजी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था। पुलिस ने गिरोह के सरगना गुलरिहा के नारायणपुर नंबर 2 टोला हीरागंज निवासी राकेश प्रजापति और भटहट चिलबिलवां निवासी जान आलम को गिरफ्तार किया था। दोनों पीलीभीत के साइबर जालसाजों से जुड़े थे।
मामले की जांच में गुलरिहा स्थित आईडीएफसी बैंक के मैनेजर सुजीत दुबे और कैशियर कमलेश की भी भूमिका सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने बैंक मैनेजर का नाम विवेचना में शामिल कर लिया था। गुलरिहा पुलिस ने बैंक प्रबंधन से पत्राचार कर बैंक मैनेजर सुजीत दुबे का स्थायी और वर्तमान पता भी मांगा था। बैंक में सुजीत ने अपना पता महाराष्ट्र का बताया था लेकिन पुलिस की जांच में वह फर्जी निकला। वहीं, कैशियर गाजीपुर का रहने वाला है। मामले की जांच कर रहे इंस्पेक्टर विजय प्रताप सिंह ने बताया कि दोनों आरोपियों को नोटिस भेजा गया है। जल्द ही उनकी गिरफ्तारी की जाएगी।
संचालित किए थे 55 खाते
पुलिस की जांच में सामने आया है कि साइबर फ्रॉड के इस नेटवर्क में आईडीएफसी बैंक सहित अन्य बैंकों में करीब 55 खातों का संचालन किया गया। ये खाते म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किए गए, जिनमें ऑनलाइन गेमिंग एप के जरिये ठगी की रकम जमा कराई जाती थी और फिर तेजी से निकाल भी ली जाती थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, आरोपी गुलरिहा के नारायणपुर नंबर दो टोला हरिजनगंज निवासी राकेश प्रजापति प्रतिदिन पांच से छह बार गुलरिहा स्थित आईडीएफसी बैंक शाखा में आता-जाता था। बैंक के कर्मचारी कमलेश से उसकी जान-पहचान होने के बाद म्यूल खातों का यह खेल शुरू हुआ था। पुलिस ने आरोपियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) की जांच की तो चौंकाने वाला सुराग हाथ लगा था। छह माह के भीतर बैंक मैनेजर सुजीत दुबे और आरोपी राकेश प्रजापति के बीच मोबाइल फोन पर करीब 750 बार बातचीत हुई थी। इसके अलावा दोनों के बीच व्हाट्सएप चैटिंग के भी प्रमाण मिले थे।