आरोपी एटीएम से रुपये निकालने जब जाते थे, तब उनका एक साथी बाहर रहता था। रुपये निकलते ही वह मशीन की बिजली काट देता था। इससे ट्रांजेक्शन पूरा नहीं हो पाता था और रसीद नहीं निकल पाती थी। कई बार आरोपी रुपये निकलते ही कैश बॉक्स के शटर में लकड़ी फंसा देते थे। इसके बाद भी पर्ची नहीं निकल पाती थी। फिर वह उपभोक्ता फोरम जाकर बैंक पर रुपये गबन का आरोप लगाता था। वह कहता था कि बैंक से रुपये कट गए, लेकिन उसे नहीं मिले। इस तरह से वह बैंककर्मियों से पांच लाख रुपये तक वसूल चुके हैं।
बैंककर्मियों ने पकड़ा था मामला
कई बार बैंक से रुपये की मांग की गई। अलग-अलग बैंक से छोटी रकम होने की वजह से बैंककर्मी खुद ही मिलकर दे देते थे, लेकिन एक लाख रुपये से ज्यादा का मामला होने के बाद बैंककर्मी जांच कर रहे थे। इसी बीच 13 जनवरी को गोरखपुर के ट्रांसपोर्ट नगर से फिर 80 हजार रुपये निकाले गए। इसके बाद बैंककर्मियों को संदेह हो गया और फिर शाखा प्रबंधक ने राजघाट थाने में केस दर्ज कराया था।
पुलिस के साथ ही आरोपी की तलाश में कैमरे की मदद से बैंक कर्मी भी लगे थे। 16 जनवरी को जैसे ही एक जालसाज आया और फिर उसने ऐसा ही किया तो उसे बैंककर्मियों ने पकड़ा लिया और पुलिस को सुपुर्द कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने जांच कर गिरोह का पर्दाफाश किया।