गोरखपुर। रेलवे बोर्ड की ओर से ग्रुप सी कर्मचारियों की दूसरे विभागों में प्रतिनियुक्ति पर रोक लगाने के आदेश से कर्मचारियों में नाराजगी है। पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ ने फैसले का विरोध करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है। संघ ने रेलवे बोर्ड से आदेश वापस लेने की मांग की है।
रेलवे बोर्ड ने आरबीई संख्या 85/2026 के तहत ग्रुप सी कर्मचारियों की दूसरे विभागों में प्रतिनियुक्ति पर रोक लगा दी है। इससे क्लर्क, टेक्नीशियन, जूनियर इंजीनियर (जेई), ऑफिस सुपरिंटेंडेंट और एसएसओ जैसे पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के दूसरे विभागों में काम करने के अवसर प्रभावित होंगे।
पहले चयन प्रक्रिया के माध्यम से कर्मचारी मेट्रो, एमटीएनएल समेत विभिन्न विभागों में प्रतिनियुक्ति पर जाते थे। वहां तीन से पांच साल तक काम करने के बाद रेलवे में लौट आते थे। इससे उन्हें नई कार्यशैली सीखने, अनुभव हासिल करने और पेशेवर विकास का अवसर मिलता था।
प्रतिनियुक्ति की सुविधा उन कर्मचारियों के लिए भी उपयोगी थी, जिनके पति-पत्नी अलग-अलग स्थानों पर नौकरी करते हैं। इसके अलावा बच्चों की पढ़ाई और पारिवारिक परिस्थितियों के कारण दूसरे राज्यों में जाने के इच्छुक कर्मचारियों को भी इससे राहत मिलती थी। अब इस व्यवस्था पर रोक लगने से कर्मचारियों के सामने पेशेवर विकास के साथ पारिवारिक जरूरतों को पूरा करने के विकल्प भी सीमित हो जाएंगे।
आदेश वापस लेने की मांग
पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ (पीआरकेएस) के महामंत्री विनोद कुमार राय ने कहा कि प्रतिनियुक्ति कर्मचारियों को अनुभव हासिल करने और आगे बढ़ने का अवसर देती थी। इस व्यवस्था पर पूरी तरह रोक लगाना उचित नहीं है। रेलवे प्रशासन को कर्मचारियों की समस्याओं और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आदेश वापस लेना चाहिए।