गीडा थानाक्षेत्र के एक गांव के रहने वाले मुन्नर के मुताबिक उसके चाचा बैरागी का साल 2020 में निधन हो चुका है। बैरागी आठ भाई थे। शादी के बाद जब संतान नहीं हुई तो परिवार और रिश्तेदारों की सलाह पर उन्होंने दूसरी शादी की।
संतान के मोह में बैरागी ने एक के बाद एक सात विवाह कर लिए इसके बाद भी बेऔलाद ही रहे। उम्रभर उनके मन में इसकी टीस बनी रही और साल 2020 में उनकी मौत हो गई। बेऔलाद बैरागी के हिस्से की संपत्ति पर परिवार के सभी सदस्यों की नजर थी। उनकी मौत के बाद संपत्ति के लिए परिवार में विवाद बढ़ गया।
बृहस्पतिवार को एसपी नॉर्थ जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव के पास शिकायत लेकर पहुंचे भतीजे मुन्नर ने दावा किया कि वह बैरागी के सबसे ज्यादा करीब था। बैरागी की पत्नियां भी उसे मानती थीं। उसने लंबे समय तक चाचा की सेवा की। बीमारी और बुढ़ापे में वही चाचा की देखभाल करता रहा था। मुन्नर का यह भी दावा है कि चाचा ने उसे ही संपत्ति का वारिस बनाने की बात कही थी।
भतीजे के पास नहीं है कोई पुख्ता कागज
बैरागी की सेवा का दावा करते हुए उनकी संपत्ति पर हक जताने वाले भतीजे मुन्नर के पास जमीन की रजिस्ट्री या रजिस्टर्ड वसीयत जैसा कोई दस्तावेज नहीं है। उसके पास सिर्फ एक कागज है, जिस पर जमीन देने की बात दर्ज है। हालांकि न तो वह स्टांप पेपर है और न ही उस पर किसी अधिकारी की मुहर या दस्तखत हैं।