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Gorakhpur News: रात में बाइक से निकले बागेश्वर सरकार, भक्त सोते रहे बाबा नगर में घूमते रहे

Sat, 20 Jan 2024 12:22 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, चिल्लूपार।

सार

आधी रात को अपने विश्राम स्थल से नगर का हाल जानने निकले कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री को उनके साथ मौजूद लोगों ने बताया कि यह रामजानकी मार्ग है, जहां से श्रीराम जी की बरात जनकपुर गई थी। इतना सुनते ही वह भाव में खो गए
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रात्रि भ्रमण पर निकले पं धीरेंद्र शास्त्री। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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बड़हलगंज की धरती बावा वागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री को रास आ गई। तभी तो वे बृहस्पतिवार की आधी रात 12 बजे में भक्तों की सुध लेने निकल पड़े। सबसे पहले उन्होंने नगर के मंदिरों में जाकर मत्था टेककर पूजा अर्चना को। इसके बाद मोटरसाइकिल से पूरे बड़हलगंज का भ्रमण किया, लेकिन उन्हें कोई पहचान नहीं सका। उनके साथ चंद लोग ही थे, जो उनका मार्गदर्शन करते रहे।

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पीठाधीश्वर रात में ही बड़हलगंज भ्रमण के बाद कथा स्थल पहुंचे, जहां भक्तों के रुकने के इंतजाम खानपान की व्यवस्था देखी। इसके बाद वे सरयू तट पर पहुंचे। कहा, आपके दर्शन कर धन्य हो गया मैया। उन्होंने प्रणाम कर फिर बुलाने का निवेदन किया।

सरयू तट पर प्रभु श्रीराम की कथा सुनाने आए बागेश्वरधाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने बृहस्पतिवार की रात्रि बाइक पर सवार होकर नगर के मंदिरों में पूजा अर्चना की और कथा पंडाल में जाकर श्रद्धालुओं से मिल कर उनका हाल जाना।

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दिव्य दरवार व राम कथा सुनाने के बाद धीरेंद्र शास्त्री अपने विश्राम स्थल चले गए। उनके जाने के बाद भी हजारों श्रद्धालु पंडाल में डटे रहे। कुछ देर विश्राम के बाद सरकार गोरखपुर के लिए निकल गए। वहां वे गुरु गोरक्षनाथ का दर्शन पूजन तथा मंदिर भ्रमण कर बड़हलगंज आए। यहां देर रात्रि बाइक से त्रेतायुगीन शिव मंदिर जलेश्वरनाथ मंदिर में भगवान भोलेनाथ की पूजा की। फिर सिद्ध हनुमानगढ़ी में हनुमानजी की आराधना की। इसके बाद आयोजक राहुल तिवारी के आवास पहुंचे और उनके परिवार वालों से मिलकर उन्हें आशीर्वाद दिया।

श्रीराम जानकी मार्ग पर चलकर हुए भावुक
आधी रात को अपने विश्राम स्थल से नगर का हाल जानने निकले कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री को उनके साथ मौजूद लोगों ने बताया कि यह रामजानकी मार्ग है, जहां से श्रीराम जी की बरात जनकपुर गई थी। इतना सुनते ही वह भाव में खो गए और मोटरसाइकिल से उतरकर 10 कदम पैदल चले और कहा ठंड है, धन्य है बड़हलगंज और यहां के लोग, जिनको भगवान श्रीराम से सीधा लगाव है। मैं तो पहली बार आया हूं, लेकिन अब मैं हर साल आने की इच्छा रखता रहूंगा।


 
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