दिव्य दरवार व राम कथा सुनाने के बाद धीरेंद्र शास्त्री अपने विश्राम स्थल चले गए। उनके जाने के बाद भी हजारों श्रद्धालु पंडाल में डटे रहे। कुछ देर विश्राम के बाद सरकार गोरखपुर के लिए निकल गए। वहां वे गुरु गोरक्षनाथ का दर्शन पूजन तथा मंदिर भ्रमण कर बड़हलगंज आए। यहां देर रात्रि बाइक से त्रेतायुगीन शिव मंदिर जलेश्वरनाथ मंदिर में भगवान भोलेनाथ की पूजा की। फिर सिद्ध हनुमानगढ़ी में हनुमानजी की आराधना की। इसके बाद आयोजक राहुल तिवारी के आवास पहुंचे और उनके परिवार वालों से मिलकर उन्हें आशीर्वाद दिया।
श्रीराम जानकी मार्ग पर चलकर हुए भावुक
आधी रात को अपने विश्राम स्थल से नगर का हाल जानने निकले कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री को उनके साथ मौजूद लोगों ने बताया कि यह रामजानकी मार्ग है, जहां से श्रीराम जी की बरात जनकपुर गई थी। इतना सुनते ही वह भाव में खो गए और मोटरसाइकिल से उतरकर 10 कदम पैदल चले और कहा ठंड है, धन्य है बड़हलगंज और यहां के लोग, जिनको भगवान श्रीराम से सीधा लगाव है। मैं तो पहली बार आया हूं, लेकिन अब मैं हर साल आने की इच्छा रखता रहूंगा।