गोरखपुर जिले के बेलीपार के हरदिया पिछौरा निवासी बी.टेक के छात्र सत्यव्रत त्रिपाठी ने माश्चर सेंसर युक्त ऑटोमेटिक वाटरिंग सिस्टम तैयार करने का दावा किया है। उनका कहना है कि यह गमलों में नमी देखकर संकेत देता है और वाटर पंप खुद चलने लगता है। जब पौधे में नमी बढ़ेगी तो खुद ही बंद हो जाएगा। इसे जल्द ही प्रदर्शनी में शामिल करेंगे।
एबीईएस इंस्टीट्यूट, गाजियाबाद से बी.टेक तृतीय वर्ष के छात्र सत्यव्रत ने बताया कि अक्सर जब लोग घरों से बाहर जाते हैं तो गमलों में लगे पौधे पानी नहीं पाने से सूख जाते हैं। कॉलेज बंद होने के चलते घर पर थे तो उन्होंने अपना प्रोजेक्ट तैयार किया।
सत्यव्रत का कहना है कि इसे तैयार करने में 600-700 रुपये खर्च हुए हैं। 10 गमलों के लिए तकनीक बनाई जाए तो 1400-1500 का खर्च आएगा। स्वायल माश्चर सेंसर के जरिए उपकरण तैयार किया है। वह गमले की मिट्टी की नमी देखकर वाटर पंप को सिग्नल भेजता है। इसके बाद नमी कम होने पर पंप चलने लगता है। उनका दावा है कि ऑटोमेटिक वाटरिंग सिस्टम से पानी बर्बाद नहीं होगा। गमले में नमी के लिए जितने पानी की जरूरत होगी, पंप उतना ही पानी देगा।