हथियारों के जखीरे को लूटकर छिपाने में दर्ज हुआ था राजद्रोह
कलकत्ता (कोलकाता) में आजादी के आंदोलन और क्रांतिकारियों के साथ काम करने के एक मामले में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने हनुमान प्रसाद पोद्दार सहित कई प्रमुख व्यापारियों को राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। आरोप लगा कि इन लोगों ने ब्रिटिश सरकार के हथियारों के जखीरे को लूटकर उसे छिपाने में मदद की थी।
कलकत्ता में वह स्वतंत्रता आंदोलन के क्रांतिकारियों अरविंद घोष, देशबंधु चितरंजन दास, पं. झाबरमल शर्मा के संपर्क में आए और आजादी के आंदोलन में कूद पड़े थे। इसके बाद लोकमान्य तिलक और गोपाल कृष्ण गोखले जब कलकत्ता आए तो भाई जी उनके संपर्क में आए, इसके बाद उनकी मुलाकात गांधीजी से हुई थी। बाद में वे जमनालाल बजाज की प्रेरणा से मुंबई चले आए। यहां वे वीर सावरकर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, महादेव देसाई और कृष्णदास जाजू जैसी विभूतियों के संपर्क में आए।
मुंबई में मारवाड़ी खादी प्रचार मंडल की स्थापना की
मुंबई में उन्होंने अग्रवाल नवयुवकों को संगठित कर मारवाड़ी खादी प्रचार मंडल की स्थापना की। मुंबई में वे अपने मौसेरे भाई ब्रह्मलीन श्रीजयदयाल गोयन्दका के गीता पाठ से बहुत प्रभावित थे। उनके गीता के प्रति प्रेम और लोगों की गीता को लेकर जिज्ञासा को देखते हुए भाई जी ने इस बात का प्रण किया कि वे श्रीमद्भागवत गीता को कम से कम मूल्य पर लोगों को उपलब्ध कराएंगे। बस यही एक छोटा सा संकल्प गीताप्रेस गोरखपुर की स्थापना का आधार बना। 29 अप्रैल 1923 को गीता प्रेस की स्थापना हुई।