रिश्तेदार पुष्पा के साथ डॉ. संतोष।
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कोरोना के कारण 80 फीसदी फेफड़ा संक्रमित होने के बाद भी बिना रेमडेसिविर इंजेक्शन लिए मरीज ठीक हो सकता है। बस संयमित होकर काढ़ा और नियमित योग व व्यायाम करना होगा। साथ ही आत्मबल बनाए रखने की जरूरत है। जी हां, कुछ इसी तरह से अपने संक्रमित रिश्तेदार को घर पर रखकर स्वस्थ किया है जिला अस्पताल के आयुष चिकित्सक डॉ. संतोष ने। दस दिनों बाद मरीज पूरी तरह ठीक हो गया और इस दौरान डॉक्टर व उनकी पत्नी ने खुद को संक्रमण से बचाए रखा।
डॉ. संतोष ने बताया कि 15 अप्रैल को रिश्तेदार पुष्पा देवी हरिद्वार से कुंभ स्नान करके घर लौटीं थीं। उनको सीने में दर्द, बुखार, खांसी आदि कोरोना के लक्षण शुरू होने लगे। एंटीजन किट और आरटीपीसीआर जांच कराया तो रिपोर्ट निगेटिव आई। मरीज की तबीयत बिगड़ती जा रही थी। ऑक्सीजन लेवल 85 से कम होता जा रहा था। दवा व इंजेक्शन लगा रहे थे फिर भी तकलीफ कम नहीं हो रही थी। चेस्ट का सिटी स्कैन कराया गया तो सिटी स्कोर 21 लगभग था यानी 80 फेफड़ा संक्रमित हो चुका था।
चिकित्सकों ने इनको लेवल-3 में तुरंत भर्ती कराने के लिए परामर्श दिया। अथक प्रयास के बाद कहीं भी बेड खाली ना होने से घर पर ही आइसोलेट करके उपचार शुरू किया गया। चेस्ट फिजिशियन डॉ. नवीबुल्लाह खान के परामर्श से इंजेक्शन, दवाइयां दी गई और उसके बाद मरीज के स्वास्थ्य में सुधार होने लगा। डॉ. ने रेमडेसिविर इंजेक्शन लगाने को कहा लेकिन इंजेक्शन नहीं मिला। इसके बाद घर पर ही आइसोलेट कर उपचार किया गया।
बताया कि मैं और पत्नी लगातार मनोबल बढ़ाते रहे। मात्र 10 दिन के अंदर खाने और चलने में असमर्थ मरीज में स्वस्थ्य सुधार दिखने लगा। उपचार के लिए दवाइयों और तरल भोज्य पदार्थ आदि के साथ हर्बल शेक और नाइटवर्क न्यूट्रिसनल डाइट भी दिया गया। जब थोड़ा सेहत में सुधार हुआ तो योग और नियमित व्यायाम कराया। अब वह पूरी तरह से ठीक हैं।