बड़हलगंज। चीन के शिपयार्ड में हादसे के दौरान जान गंवाने वाले सांऊखोर गांव निवासी 20 वर्षीय अतुल जायसवाल का पार्थिव शरीर 34 दिन बाद सोमवार देर शाम पैतृक गांव पहुंचा। शव पहुंचते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव में मातम छा गया। मुक्तिपथ पर बड़े भाई आलोक ने मुखाग्नि दी। सांऊखोर निवासी दिलीप जायसवाल के छोटे बेटे अतुल मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे। उनके मामा अमर जायसवाल सिंगापुर में मर्चेंट नेवी में काम करते हैं। उन्हीं के माध्यम से अतुल को नौकरी मिली थी। परिजनों के मुताबिक, नौ सितंबर को अतुल बड़हलगंज से मुंबई गए थे। वहां कंपनी ने वीजा संबंधी प्रक्रिया पूरी कर उन्हें दिल्ली से हवाई जहाज के जरिए चीन भेजा था।
14 सितंबर को अतुल ने द ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी लिमिटेड के मर्चेंट नेवी जहाज एमवी जग अक्षय पर नाविक के रूप में कार्यभार संभाला था। नौकरी शुरू करने के महज दो दिन बाद, 16 सितंबर को चीन के जूशान स्थित लॉन्गशान शिपयार्ड में काम के दौरान मैनहोल में गिरने से उनकी मौत हो गई।