डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि हेपेटाइटिस बी के ज्यादातर मामलों में असुरक्षित यौन संबंध बड़ा कारण है। कई मरीजों की हिस्ट्री खंगाली गई तो पता चला कि असुरक्षित यौन संबंध की वजह से उन्हें यह खतरनाक बीमारी हुई है। लेकिन, इसकी जानकारी उन्हें बाद में हुई। ऐसे 40 फीसदी मामले हर साल आते हैं।
झोलाछाप ने बढ़ाया संक्रमण
ग्रामीण इलाकों में इलाज कराने वाले लोगों में हेपेटाइटिस की बड़ी वजह झोलाछाप हैं। काउंसिलिंग के दौरान जानकारी मिली कि झोलाछाप एक ही सुई से कई लोगों को इंजेक्शन लगा देते हैं। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक प्रभारी डॉ राजेश कुमार ने बताया कि ग्रामीण इलाकों के अधिकतर मरीजों में हेपेटाइटिस-बी के मामले सामने आते हैं।
हेपेटाइटिस मरीजों के इलाज का खर्च दोगुना
हेपेटाइटिस का संक्रमण बेहद खतरनाक माना जाता है। यही कारण है कि सरकारी अस्पतालों में हेपेटाइटिस-बी, सी जैसे मरीजों की सर्जरी करने में काफी दिक्कतें होती हैं। संक्रमित मरीजों की सर्जरी के बाद इस्तेमाल होने वाले सभी उपकरणों को नष्ट करना पड़ता है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी ऑपरेशन का खर्च सामान्य तौर पर 50 हजार है तो हेपेटाइटिस बी या सी संक्रमित होने पर उसी ऑपरेशन का खर्च एक लाख तक हो जाता है।
थकान, गहरे रंग का पेशाब आना, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, भूख में कमी, बुखार, पेट में परेशानी होना, कमजोरी, जी मिचलाना, उल्टी आना, आंखों और त्वचा का पीला पड़ जाना।
केस-1
बसंतपुर के रहने वाले 40 वर्षीय एक व्यक्ति का सड़क हादसे में पैर टूट गया था। बीआरडी में दिखाया तो डॉक्टर ने ऑपरेशन की बात कही। ऑपरेशन से पहले रूटीन जांच कराई। वायरल मार्कर जांच में हेपेटाइटिस सी की पुष्टि हुई। उन्हें यह पता ही नहीं कि वह संक्रमण की चपेट में कहां से आ गए। हेपेटाइटिस सी संक्रमण की जानकारी होने पर डॉक्टर ने सर्जरी से हाथ खड़े कर दिए।
केस-2
दीवान बाजार की रहने वाली 45 वर्षीय महिला को ट्यूमर का ऑपरेशन कराना था। पति इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज लेकर गए। डॉक्टरों ने सर्जरी की सलाह दी। सर्जरी से पहले रूटीन जांच में हेपेटाइटिस बी की जानकारी हुई। महिला संक्रमण का शिकार कैसे हुईं, उन्हें जानकारी नहीं। डॉक्टरों ने ऑपरेशन के लिए अलग से व्यवस्था की, तब जाकर ऑपरेशन हो सका।