पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस) के लिए जासूसी के मामले में हनीफ उर्फ आरिफ को एटीएस ने दो दिन बाद सोमवार को छोड़ दिया है। हालांकि उसकी निगरानी जारी रहेगी।
पूछताछ में हनीफ ने एयरफोर्स स्टेशन, कूड़ाघाट स्थित गोरखा रेजीमेंट और रेलवे स्टेशन की फोटो भेजने की बात कबूल की है। एटीएस ने हनीफ को दो दिन पहले गोरखपुर रेलवे स्टेशन के पास से उठाया था और लखनऊ लेकर चली गई थी।
जानकारी के मुताबिक पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने हनीट्रैप के जरिये हनीफ को अपने जाल में फंसाया था। व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये हनीफ खुफिया जानकारी आईएसआई को भेजता था। खबर है कि एयरफोर्स के अंदर की फोटो मांगने पर वह डर गया और बातचीत बंद कर दी थी।
सेना से जुड़ी खुफिया एजेंसियों को हनीफ के बारे में शुरुआती जानकारी मिली थी। इसके बाद एटीएस ने उस पर काम करना शुरू किया तो पता चला कि हनीफ की रिश्तेदारी पाकिस्तान में है। वर्ष 2014-18 के बीच कई बार वह पाकिस्तान आया-गया है।
इसी दौरान आईएसआई ने उसे हनीट्रैप के जरिए अपने जाल में फंसा लिया और ब्लैकमेल कर उसे अपने लिए जासूसी करने के काम में लगा दिया। खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर एटीएस ने पांच अगस्त को अयोध्या में आयोजित राम मंदिर भूमिपूजन कार्यक्रम के संबंध में हनीफ पर लगातार निगाह रखी थी।