बदमाशों को जैसे ही इसकी भनक लगी, वह उद्योगपति के साथ मौजूद राधे को इसकी सूचना पहुंचा दी और फिर बिहार के गंडक नदी में नाव पर लेकर छिप गया। इसके बाद पुलिस ने उद्योगपति को बरामद कर चौरीचौरा से राधे यादव को गिरफ्तार कर लिया। अगले ही दिन पुलिस उसे पेशी पर लेकर आ रही थी।
कुसम्ही जंगल के पास वह भागने की कोशिश किया और पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। इस मुठभेड़ के बाद पुलिस फरार अमित मोहन वर्मा और रामायण उपाध्याय की तलाश में जुटी थी कि इसी बीच दोनों बदमाशों ने सूरजकुंड कॉलोनी में नर्सिंग होम चलाने वाले डॉ. जेपी सिंह की रंगदारी न देने पर गोलियों से भूनकर हत्या कर दी थी।
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इन्हें पकड़ने में पुलिस पूरी तरह से फेल थी। वहीं, बदमाश भागकर प्रयागराज में अपने आका अतीक अहमद के शरण में पहुंच गए थे। रिटायर्ड पुलिस अफसर शिवपूजन बताते हैं, पुलिस ने सटीक मुखबिरी पर प्रयागराज के एक होटल से खाना खाकर निकलते समय अमित मोहन वर्मा और रामायण उपाध्याय को उठा लिया था।
लेकिन, 6 मई 2004 की रात में नार्मल मैदान के पास भागने के दौरान दोनों बदमाश मुठभेड़ में ढेर कर दिए गए थे। तब पुलिस की जांच में यह सामने आया था कि अतीक ने ही दोनों को शरण दी थी। लेकिन, सत्ता का दबाव होने की वजह से फाइल दब गई थी।
दोनों बदमाशों के मुठभेड़ को लीड करने करने वाले रिटायर पुलिस अफसर (उस समय सीओ कोतवाली) शिवपूजन यादव बताते हैं, अमित मोहन वर्मा और रामयण उपाध्याय को पुलिस टीम ने प्रयागराज के एक होटल से पकड़ा था। दोनों बदमाशों ने वहीं पर शरण ली थी और फिर पुलिस टीम लेकर आई थी। बाद में बदमाशों ने भागने की कोशिश की थी और नार्मल मैदान के पास मुठभेड़ में मारे गए थे।
गुर्गे लेते थे गोरखपुर के होटल में शरण
2017 में जब अतीक को देवरिया जेल में लाया गया था, तब पेशी से पहले गोरखपुर के होटलों में गुर्गे शरण लिया करते थे। लेकिन, बाद में सख्ती हुई और सरकार की ओर से तय किया गया कि अतीक को हर बार बदले रास्ते से पेशी पर लेकर जाया जाएगा। तब उसके गुर्गे देवरिया के होटलों को अपना ठिकाना बना लिए थे।
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अतीक का करीबी गुड्डू मुस्लिम भी गोरखपुर में रहा सक्रिय
अतीक का करीबी गुड्डू मुस्लिम भी गोरखपुर में सक्रिय रहा है। जेल प्रशासन के मुताबिक, गुड्डू साल 2001 में गोरखपुर जेल के दो नंबर बैरक में बंद था। इस बैरक को कच्ची बैरक भी कहा जाता था। उस समय परवेज टांडा के साथ गुड्डू मुस्लिम और गोरखपुर के कई कुख्यात बदमाश भी यहां बंद थे।
गुड्डू गोरखपुर निवासी आतंकी दिलशाद मिर्जा बेग का गुर्गा था। गोरखपुर के कोतवाली इलाके में इसी आतंकी के रिश्तेदार सहदाब की मदद से किराये के मकान में रहता था।
इस गिरोह में मेनका टॉकिज (वर्तमान में एडी मॉल) बम ब्लास्ट का आरोपी परवेज टांडा भी शामिल था। परवेज की मौत के बाद गुड्डू ने गोरखपुर छोड़कर अतीक गिरोह का दामन थाम लिया था। सेवानिवृत्त सीओ शिवपूजन यादव बताते हैं कि दिलशाद बेग आईएसआई के संपर्क में आने के बाद गोरखपुर छोड़कर नेपाल में बस गया था। उसने वहां पर भी अपराध शुरू कर दिया था।
गोरखपुर में 90 के दशक में विजय चौक स्थित मेनका टॉकिज में कुख्यात बदमाश परवेज टाडा ने बम ब्लास्ट कराया था। उस वक्त उसका आतंक चरम पर था और गुड्डू उसका सबसे करीबी था। बताया जाता है कि इस घटना में भी परवेज के लिए बम गुड्डू मुस्लिम ने ही मुहैया कराया था। यही नहीं, गुड्डू मुस्लिम ने परवेज के इशारे पर गोरखपुर और आसपास के इलाकों में कई घटनाओं को अंजाम दिया था।
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परवेज की मौत गुड्डू को अतीक के नजदीक लाई
गोरखपुर से फरार अपराधी परवेज टांडा ने नेपाल में जाली नोटों के कारोबार से खूब पैसा कमाया। वह नेपाल में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा था। इसी बीच 25 दिसंबर 2009 को नेपाल में परवेज की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद परवेज का गैंग खत्म हो गया।
वहीं, उसका करीबी गुड्डू मुस्लिम ने प्रयागराज की ओर अपना रुख कर लिया। प्रयागराज में वह अतीक के संपर्क में आया। गोरखपुर एसटीएफ ने भी एक बार गुड्डू मुस्लिम को गिरफ्तार किया था। तब अतीक ने ही पैरवी कर उसे जेल से बाहर निकालने में मदद की थी।