गोरखपुर। हर वर्ष 30 जून को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस केवल अंतरिक्ष विज्ञान का उत्सव नहीं, बल्कि पृथ्वी की सुरक्षा और वैज्ञानिक जागरूकता का वैश्विक अभियान है।
अमर पाल सिंह के अनुसार अधिकांश क्षुद्रग्रह मंगल और बृहस्पति के बीच स्थित मुख्य क्षुद्रग्रह पट्टी में पाए जाते हैं, जबकि कुछ पृथ्वी के निकट भी गुजरते हैं। हालांकि हर क्षुद्रग्रह पृथ्वी के लिए खतरा नहीं होता। दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियां लगातार इनकी निगरानी कर संभावित जोखिम का आकलन करती रहती हैं। उन्होंने बताया कि क्षुद्रग्रहों का अध्ययन ग्रहों की उत्पत्ति, सौरमंडल के विकास और पृथ्वी की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। आधुनिक दूरबीनों, अंतरिक्ष वेधशालाओं और कंप्यूटर आधारित तकनीकों के साथ अब नागरिक वैज्ञानिक भी एस्टेरॉयड खोज अभियानों में भाग लेकर योगदान दे सकते हैं।
खगोलविद ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस हमें यह संदेश देता है कि अंतरिक्ष विज्ञान केवल ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने का माध्यम नहीं, बल्कि मानवता के सुरक्षित भविष्य की तैयारी का भी महत्वपूर्ण आधार है। वैज्ञानिक निगरानी और वैश्विक सहयोग से भविष्य में संभावित अंतरिक्षीय खतरों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।