गोरखपुर। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में रोजगारपरक शिक्षा और शोध की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया गया है। विद्या परिषद की बैठक में तीन नए बीटेक पाठ्यक्रम शुरू करने, शोध के नियम कड़े करने और कम प्रवेश वाले परास्नातक पाठ्यक्रमों की समीक्षा जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
कुलपति प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में विद्या परिषद ने शैक्षणिक सत्र 2027-28 से खाद्य प्रौद्योगिकी, यांत्रिक एवं यांत्रिकीकरण (एडिटिव विनिर्माण) व गणित एवं संगणन में बीटेक पाठ्यक्रम शुरू करने को मंजूरी दी। प्रत्येक पाठ्यक्रम में 30-30 सीटें होंगी। इन पाठ्यक्रमों के लिए अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद में आवेदन सहित अन्य औपचारिकताएं जल्द शुरू कर दी जाएंगी।
बैठक में विश्वविद्यालय में स्मार्ट प्रक्रिया उद्योग केंद्र स्थापित करने का भी निर्णय लिया गया। यह केंद्र स्मार्ट विनिर्माण, स्वचालन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, आंकड़ा विश्लेषण और आधुनिक औद्योगिक प्रक्रियाओं पर शोध एवं प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र बनेगा।
इसके अलावा लगातार कम प्रवेश वाले परास्नातक पाठ्यक्रमों की समीक्षा कर उनकी जगह मांग के अनुरूप नए पाठ्यक्रम शुरू करने पर भी सहमति बनी। जुलाई 2026 में हुए 97 पीएचडी प्रवेश की जानकारी भी परिषद के समक्ष रखी गई। विद्या परिषद ने 11वें दीक्षांत समारोह में उपाधियां और स्वर्ण पदक प्रदान करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी।
पीएचडी के नियम हुए और सख्त
बैठक में सबसे अहम फैसला पीएचडी नियमों को लेकर हुआ। अब स्नातक के बाद सीधे पीएचडी में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को 20 क्रेडिट का पाठ्यक्रम पूरा करना होगा। परास्नातक के बाद प्रवेश लेने वालों के लिए 12 क्रेडिट का प्रावधान रहेगा। साथ ही शोध प्रबंध जमा करने से पहले शोधार्थी के कम से कम दो शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचीबद्ध शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित होना अनिवार्य होगा। प्रबंधन अध्ययन और मानविकी विषयों को पहले मिली छूट भी समाप्त कर दी गई है।