फर्जी शस्त्र लाइसेंस का मामला सामने आने के बाद करीब चार महीने तक खामोश बैठे असलहों की चाहत रखने वालों का शौक फिर जाग उठा है। यही वजह है कि एक महीने में शस्त्र लाइसेंस के 130 से अधिक आवेदनों पत्रों की बिक्री हो चुकी है जिससे सरकारी खजाने में 65 हजार का राजस्व जुड़ा है। उधर शस्त्र लाइसेंस बनाने पर लगी रोक हटने के बाद पहले से आवेदन कर चुके चार हजार आवेदनों को लेकर भी लोगों ने पैरवी तेज कर दी है।
दिसंबर 2018 में शस्त्र लाइसेंस बनाने को लेकर रोक हटाई गई थी। इसके बाद महीने भर में ही चार हजार से अधिक आवेदन पत्रों की बिक्री हुई। जब तक नए फार्म छपकर आते लोकसभा चुनाव का बिगुल बज गया। आचार संहिता खत्म हुई तो एक फिर आवेदकों ने पैरवी शुरू की मगर 14 अगस्त 2019 को फर्जी शस्त्र लाइसेंस का सनसनीखेज मामला सामने आ गया।
इस मामले में जब कलेक्ट्रेट के कर्मचारी समेत तमाम लोगों पर कार्रवाई शुरू हुई तो असलहे के शौकीन भी एक बारगी सहम गए। करीब चार महीने तक कोई भी कदरदान शस्त्र कार्यालय तो दूर कलेक्ट्रेट परिसर में भी नहीं दिखाई दिया। जिनके शस्त्र लाइसेंस सही थे वे भी डरे थे कि उनका नाम भी इस लपेटे में न आ जाए। मगर जैसे ही जांच पूरी हुई। 10 दिसंबर के बाद से फिर से शस्त्र कार्यालय में भीड़ बढ़ने लगी है। नए आवेदन पत्र खरीदने के साथ ही पुराने आवेदक भी पैरवी में जुट गए हैं।