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नंदानगर क्रासिंग से शमशेर गेट के बीच सीवर लाइन बिछाने की राह में रेलवे की भी ‘अड़चन’

Sat, 18 Jan 2020 06:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो राजीव रंजन, अमर उजाला, गोरखपुर

सार

योजना एक नजर में
  • - परियोजना की कुल लागत- 174.08 करोड़ --(अपर जोन- 72.27 करोड़, लोअर जोन- 101.81 करोड़)
  • - कुल घरों की संख्या- 13360 (अपर जोन- 9180, लोअर जोन- 4180)
  • - सीवर लाइन की लंबाई- 136.04 किलोमीटर (अपर जोन- 55.57 किलोमीटर, लोअर जोन- 80.27 किलोमीटर)
  • - 15 एमएलडी क्षमता वाले सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से इसे जोड़ा जाएगा।
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सीधे रामगढ़ ताल में गिरता है घरों का गंदा पानी - फोटो : file photo
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विस्तार
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नंदानगर क्रासिंग से शमशेर गेट के बीच सीवर लाइन बिछाने के लिए रेलवे की भी अड़चन है। कॉलोनियों को जोड़ने के लिए सीवर लाइन को नंदानगर क्रासिंग (न्यू प्रोजेक्ट रोड) के नीचे से गुजारना है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से रेलवे प्रशासन ने इस पर आपत्ति जता दी है और ट्रेंचलेस तकनीक से सीवर लाइन डालने को कहा है। ऐसे में कार्यदायी संस्था जल निगम ने इसका प्रस्ताव तैयार कर अमृत योजना के स्थानीय निदेशालय को भेज दिया है।
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नंदानगर वार्ड में नंदानगर क्रासिंग के दोनों ओर कई कॉलोनियां हैं। इन कॉलोनियों में सीवर लाइन बिछाने के साथ सभी घरों में कनेक्शन देने के लिए रेलवे लाइन के सामने सीवर लाइन बिछाने के साथ इसे क्रॉस भी करना पड़ेगा। सुरक्षा के दृष्टिकोण से रेलवे प्रशासन ने इसके लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र देने से इंकार कर दिया है।

साथ ही ट्रेंचलेस तकनीक से काम कराने का सुझाव दिया है। इसके बाद जल निगम ने इसका लेआउट तैयार कर स्थानीय निदेशालय अमृत योजना को भेज दिया है। इस पर एक करोड़ रुपये से भी ज्यादा की लागत आने की संभावना है। शुक्रवार को जल निगम के अधिकारियों ने लखनऊ में स्थानीय निदेशालय अमृत योजना के अधिकारियों के सामने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेंशन दिया।
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एक्सईएन जल निगम एवं परियोजना प्रबंधक रामगढ़ रतनसेन सिंह ने बताया कि ट्रैक के बगल में होने की वजह से रेलवे ने ट्रेंचलेस विधि से काम कराने का सुझाव दिया है। इसपर आने वाले खर्च को स्थानीय निदेशालय अमृत योजना की ओर से रेलवे को दिया जाएगा। इसके बाद रेलवे इस संबंध में अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी करेगा। फिर कनेक्शन देने और टेस्टिंग का काम पूरा कर लिया जाएगा।

करीब 174 करोड़ की लागत से बिछाई जा रही है सीवर लाइन
शहर के पांच वार्ड महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर एक, महादेव झारखंडी टुकड़ा नंबर दो, इंजीनियरिंग कॉलेज, झरना टोला और गिरधरगंज समेत पांच वार्डों के घरों का गंदा पानी सीधे रामगढ़ ताल में गिरता है।

रामगढ़ ताल परियोजना के परियोजना अधिकारी रतनसेन सिंह ने बताया कि इस पानी को रामगढ़ ताल में पानी को गिरने से रोकने के लिए जल निगम परियोजना के अंतर्गत 174.09 करोड़ रुपये की लागत से 136 किलोमीटर सीवर लाइन बिछाने का काम किया जा रहा है।
 
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अभी तक न टेस्टिंग और न हाउस कनेक्शन

नंदानगर और इंजीनियरिंग कॉलेज वार्ड के घरों से निकलने वाला गंदा पानी रामगढ़ ताल में गिरने से रोकने के लिए करीब दो साल से सीवर लाइन बिछाई जा रही है, लेकिन बहुत सारे इलाके में अब तक न हाउस कनेक्शन दिया जा सका है और न ही टेस्टिंग की जा सकी है।

ऐसे में नंदानगर और इंजीनियरिंग वार्ड के लोगों को अभी कुछ दिन और परेशानी झेलनी पड़ेगी। जल निगम के एक्सईएन और रामगढ़ ताल परियोजना प्रबंधक रतनसेन सिंह का कहना है कि अप्रैल तक काम पूरा होने की उम्मीद है।

सीवर लाइन बिछ भी जाए तो भी सड़क करती रहेगी परेशान
नंदानगर और इंजीनियरिंग कॉलेज में सीवर लाइन बिछाने की वजह से जिन सड़कों का हाल बेहाल है, उनको ठीक कराने को लेकर भी कोई बहुत बेहतर संभावना नजर नहीं आ रही है। सीवर लाइन बिछाने वाले विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रावधान के अनुसार सीवर लाइन बिछाने के बाद सड़क को फिर से पहले की तरह करना है।

यानी जहां मिट्टी की सड़क थी, वहां मिट्टी डाली जाएगी और जहां कंक्रीट, इंटरलॉकिंग या तारकोल की सड़क थी, वहां सीवर लाइन खुदाई के बाद उसे भरने के बाद पूर्व की सड़कों की तरह पैचवर्क कर दिया जाएगा। ऐसे में लोगों को नई सड़क मिलने की कोई उम्मीद नहीं है।

चीफ इंजीनियर, नगर निगम सुरेश चंद ने कहा कि सीवर लाइन बिछाने के बाद सड़क को फिर से उसी तरह का बनाना कार्यदायी संस्था की जिम्मेदारी है। नगर निगम का उन सड़कों को बनाने की कोई जिम्मेदारी नहीं है।

परियोजना प्रबंधक रामगढ़ताल रतनसेन सिंह ने बताया कि प्रोजेक्ट के प्रावधान के अनुसार सीवर लाइन बिछाने के बाद उन सड़कों को पहले की तरह किया जाना है। काफी संख्या में सड़कों को ठीक भी कर दिया गया है। वहीं कई स्थानों पर अब तक टेस्टिंग और हाउस कनेक्शन दिया जाना बाकी रह गया है। उसको पूरा करने के बाद सड़कों की मरम्मत की जाएगी।
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